ऊधमसिंह नगर पुलिस को दो महीने पहले बाबा तरसेम सिंह हत्याकांड में शामिल शूटर सरबजीत सिंह के तरनतारन में होने की जानकारी मिली थी। दो से तीन बार सूचना मिलने पर पर एसएसपी ने चार सिपाहियों को तस्दीक के लिए तरनतारन भेजा। बड़ा जिला होने से सरबजीत का पता नहीं चल सका। इसके बाद लगातार कुछ अंतराल के बाद कांस्टेबल वहां जाकर जानकारी जुटाते रहे। जिले की खाक छानते हुए टीम ने सरबजीत की नशे की आदत से मिले क्लू से उस तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की।
सरबजीत सिंह ने हत्याकांड के बाद कई जगहों पर शरण ली। ऊधमसिंह नगर पुलिस उसकी तलाश में विभिन्न राज्यों की खाक छानती रही। इधर सरबजीत सिंह कई जगहों से भागता हुआ अपने गांव में जाकर गुपचुप ठहर गया। यहां उसने घर से निकलना लगभग बंद कर दिया था। हालांकि उसके मोंगा और अमृतसर जाने की भी बात है।
एसएसपी के अनुसार दो महीने पहले सरबजीत सिंह के तरनतारन में होने की जानकारी मिली थी। इस पर टीम को वहां भेजा गया, साथ ही सरबजीत के संपर्क में रहने वाले 100 से अधिक रिश्तेदारों और परिचितों की लोकेशन व गतिविधियों की जानकारी की गई थी। इसके बाद उसके अपने ही गांव में होने की जानकारी मिली थी।
पड़ताल में पुलिस को पता चला कि सरबजीत सिंह को नशे की आदत है। इस पर टीम ने लोकल में नशा बेचने वाले गैंग से मेल मिलाप बढ़ाया। एक नशा बेचने वाले से सादे वेश में सिपाही ने दोस्ती कर ली थी। यहां टीम को पता चला कि सरबजीत अफीम और डोडा का आदी है। वह घर पर ही नशा मंगाता है और कभी कभार ही नशा लेने घर से बाहर निकलता है, वो भी सिर्फ अंधेरे में। उसी नशा बेचने वाले ने घर में सरबजीत के होने की पुष्टि की थी।
फोटो थी पर किसी को तस्दीक करने के लिए नहीं दिखाया
धैर्य के साथ सटीक रणनीति ने ऑपरेशन सरबजीत को अंजाम तक पहुंचाया
पंजाब के तरनतारन जिले में दो लाख के इनामी सरबजीत सिंह की लोकेशन ट्रेस करने में पुलिस कर्मियों को दो महीनों का वक्त भले ही लगा लेकिन धैर्य के साथ अपनाई रणनीति सटीक साबित हुई। पुलिस से बचने के लिए ठिकाना और हुलिया बदलने के बाद सरबजीत ने जिस घर में में खुद को सीमित कर लिया, वहीं से वह गिरफ्त में आ गया।
एक साल जिस फिल्मी अंदाज में सरबजीत सिंह और अमरजीत सिंह ने बाबा तरसेम सिंह की हत्या को अंजाम दिया। उसी अंदाज में सरबजीत की गिरफ्तारी भी हुई है। सरबजीत ने हत्या के बाद यूपी, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में शरण ली और कई महीने से वह अपने गांव में ही धार्मिक स्थल के पास स्थित घर में रह रहा था।
उसके साथ दो पालतू कुत्ते भी रखे थे। पुलिस के दो महीने पहले सरबजीत से तरनतारन में होने की जानकारी मिली थी। इस पर पुलिस ने चार सिपाहियों को तरनतारन भेजा। धीरे-धीरे इनपुट मिलते गए और पुलिस को उसके मियां विंड में होने की जानकारी हाथ लगी थी। आमतौर पर तरनतारन में दूसरे घरों की तरह इस घर में ही बेसमेंट बना हुआ था और उसमें सरबजीत रहता था। बेसमेंट में लोहे का बड़ा दरवाजा लगवाया गया था। पुलिस ने दरवाजा तोड़ने की जरूरत पड़ने पर सब्बल भी खरीदा था। हालांकि उसकी पुलिस को जरूरत नहीं पड़ी।
एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने बताया कि तरनतारन के मियां विंड स्थित घर में सरबजीत सिंह के होने की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने वहां प्रवेश किया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उस समय घर में सरबजीत सहित नाै लोग माैजूद थे।
10 लाख में ली थी हत्या की सुपारी, किस्तों में की रकम
पांच बार घुसने की कोशिश की थी
पुलिस ने ऑपरेशन सरबजीत को मुकाम तक पहुंचाने के लिए फूंक-फूंककर कदम रखा था। पुलिस को सरबजीत के घर पर होने और वहां हथियारबंद लोगों की मौजूदगी की शंका भी थी। सरबजीत के आपराधिक इतिहास को देखते हुए पुलिस दूसरे राज्य में दबिश में कोई विवाद नहीं चाह रही थी।। एसएसपी के अनुसार टीम ने पांच बार घर में घुसने की कोशिश की थी। छठी बार में टीम सरबजीत को पकड़कर ऑपरेशन को अंजाम देने में कामयाब हुई।
मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करता था सरबजीत सिंह
शूटर सरबजीत सिंह ने तरसेम सिंह हत्याकांड को अंजाम देने के बाद एक से दो बार ही अपनी पत्नी से मुलाकात की थी। वह अपने पास मोबाइल नहीं रखता था। वे मैनुअल ही परिवार का हाल दोस्तों और परिचितों से बेहद गोपनीय ढंग से ले लेता था। उसकी गांव में सात से आठ एकड़ जमीन और दो बच्चे हैं।