बहुचर्चित बाबा तरसेम सिंह हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार बाबा अनूप सिंह आखिरकार कानून के शिकंजे में फंस गए। बाबा अनूप सिंह से संपर्क के बाद दिलबाग ने तरसेम की हत्या के लिए पंजाब के शूटर सबरजीत और अमरजीत से संपर्क किया गया। सूत्रों के अनुसार यह पूरा हत्याकांड डेरा कार सेवा की संपत्ति पर वर्चस्व को लेकर अंजाम दिया गया। पुलिस की टीम अनूप सिंह से पूछताछ कर रही है।
28 मार्च 2024 को नानकमत्ता में बाबा तरसेम सिंह की हत्या गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इसमें नामजद शूटर अमरजीत उर्फ बिट्ट का आठ अप्रैल 2024 को हरिद्वार में एनकाउंटर कर दिया गया था। इसके अलावा शूटर सरबजीत सिंह सहित नौ अभियुक्तों को पुलिस ने विभिन्न जगहों से गिरफ्तार जेल भेजा था। पूरा हत्याकांड के केंद्र में दिलबाग, सुल्तान, सतनाम आए थे। तत्कालीन विवेचक ने गहराई से तफ्तीश की थी तो सूत्रधार के रूप में गुरुद्वारा श्री हर गोविंद सिंह रतनपुरा नवाबगंज के मुख्य जत्थेदार बाबा अनूप सिंह का नाम सामने आया था। अनूप का नाम हत्याकांड के बाद केस में बाईस्तवा दर्ज किया गया था। पुलिस ने अनूप सिंह को घटना का मुख्य साजिशकर्ता माना था। यह सामने आया था कि करीब दो साल से हत्याकांड की साजिश बुनी जा रही थी। हत्याकांड से एक साल पहले सरबजीत सिंह और अमरजीत सिंह नानकमत्ता आया था मगर वे हत्याकांड को अंजाम नहीं दे सका। सूत्र बताते हैं कि धार्मिक स्थलों में एकाधिकार के वर्चस्व में हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। सबरजीत सिंह ने पूछताछ में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं दी थी। लेकिन उसने दिलबाग से मुलाकात और उसके घर पर राइफल की टेस्टिंग की बात मानी थी।
हत्याकांड में अनूप सिंह मुख्य साजिशकर्ता में शामिल है। विवेचना में यह सामने आ चुका है। इसके चलते ही अनूप के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई के साथ ही 25 हजार का इनाम भी रखा गया था।-मणिकांत मिश्रा, एसएसपी
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हत्याकांड से 22 दिन पहले बाबा तरसेम ने जताई थी अपनी हत्या की आशंका
धार्मिक डेरा कार सेवा के जत्थेदार बाबा तरसेम सिंह ने अपनी हत्या से 22 दिन पहले अपनी हत्या की आशंका जताते हुए शासन प्रशासन को पत्र लिखकर भेजा था। अमर उजाला ने 07 मार्च 2024 के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। 28 मार्च 2024 को डेरा कार सेवा में घुसकर बाइक सवार दो हत्यारों द्वारा गोली मारकर बाबा तरसेम सिंह की हत्या करने से 21 दिन पहले छह मार्च को बाबा तरसेम सिंह ने अपनी हत्या होने की आशंका को लेकर शासन प्रशासन को पत्र भेजा था। बाबा तरसेम सिंह की जान की फिक्र धार्मिक डेरा कार सेवा के मुखी सचखंड वासी पंथ रतन संत बाबा हरवंश सिंह को भी थी। 18 वर्ष पूर्व वर्ष 2008 में बाबा हरवंश सिंह ने तत्कालीन सरकार , प्रदेश सचिव, पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन भेज कर डेरा कर सेवा की संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए बाबा तरसेम सिंह की हत्या की आशंका जताते हुए सुरक्षा की मांग की थी।