रुद्रपुर। जगतपुरा स्थित प्राचीन अटरिया मेले में मंगलवार को शोभायात्रा के साथ अटरिया देवी का डोला पहुंचा। कड़ी सुरक्षा के बीच माता के डोले को सैकड़ों श्रद्धालु भजन, कीर्तन के साथ मंदिर में लेकर पहुंचे। वहां पूजा, अर्चना के साथ माता को विराजमान कराया गया। इसके साथ ही एक माह माह चलने वाला ऐतिहासिक अटरिया मेला शुरू हो गया।
प्राचीन अटरिया देवी मंदिर में हर वर्ष चैत्र में बड़ा मेला लगता है। एक माह तक चलने वाले इस मेले में श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। मां अटरिया मंदिर वैष्णो धर्मसभा की ओर से मंगलवार को शोभायात्रा के साथ मां अटरिया देवी का डोला मंदिर में लाया गया। रंपुरा से महंत मां पुष्पा देवी की अगुवाई में माता का भव्य डोला गाजे-बाजे के साथ शुरू हुआ।
हवन, कन्या पूजन के बाद माता की प्रतिमा को भव्य डोले में विराजमान कराया गया। इसके बाद सैकड़ों श्रद्धालु माता के डोले को लेकर अटरिया मंदिर की ओर रवाना हुए। इस बीच कई जगह पुष्पवर्षा से माता के डोले का स्वागत किया गया। अटरिया मंदिर में पूजा, अर्चना के साथ माता की प्रतिमा को धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मंदिर में स्थापित किया गया। इसके बाद महंत पुष्पा देवी ने मेले का शुभारंभ किया। वहां स्वामी शिवानंद महाराज, पंकज गौड़, सुनीता गौड़, दीपा शर्मा, हिमांशु गावा, किशन सुखीजा, सौरभ शर्मा, भोला सुखीजा, अरशद खां, पुरुषोत्तम अरोरा, अनिल शर्मा, मीना शर्मा, जगदीश टंडन, जगदीश तनेजा, नत्थू लाल गुप्ता, कालीचरन, सन्नी अरोरा आदि थे।
रुद्रपुर। शोभायात्रा के साथ निकला अटरिया माता का डोला आकर्षण का केंद्र बना रहा। माता के डोले में सबसे आगे बैंड चल रहा था। साथ में मां काली अखाड़ा, बजरंग बली अखाड़ा की झांकी सबको लुभा रही थी। भगवान शंकर पार्वती, राधा कृष्ण, मां काली, श्रीगणेश सहित कई देवी देवताओं की भव्य झांकियां भी सजाई गई थी। माता के डोले को बिलासपुर रामपुर से आए सेवादार कंधों पर उठाकर ले गए। श्रद्धालुओं ने कई जगह पुष्प वर्षा के साथ डोले का स्वागत किया। जिस रास्ते से भी डोला गुजरा वहां दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई।
रुद्रपुर। मां अटरिया देवी की प्रतिमा को रंपुरा से भव्य डोले में विराजमान कराकर कड़ी सुरक्षा के बीच अटरिया मंदिर लाया गया। माता की प्रतिमा की सुरक्षा के लिए डोले को पुलिस घेरे में ले जाया गया। इसके साथ ही श्रद्धालु भी सुरक्षा घेरा बनाए हुए थे। अटरिया देवी मंदिर भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है। यहां हर वर्ष विराजमान होने वाली माता की प्रतिमा के दर्शन के लिए भीड़ उमड़ती है। मंगलवार को मेला शुरू होने के साथ ही दर्शन को श्रद्धालु पहुंचने लगे। माता के डोले के साथ आए कई श्रद्धालु रंपुरा से ही नंगे पैर चलकर मंदिर पहुंचे। मेला आयोजकों ने बताया 24 अप्रैल की शाम चार बजे माता के डोले की विदाई की जाएगी, तब तक प्रतिदिन मंदिर के द्वार प्रात: पांच बजे से रात्रि 10 बजे तक खुले रहेंगे।