रुद्रपुर शहर में चार हजार से अधिक ई-रिक्शों का संचालन हो रहा है। ऐसे में ई-रिक्शा संचालन में कई परेशानियां सामने आ रही हैं, इसके लिए परिवहन विभाग भी ई-रिक्शा संचालकों की समस्याओं के समाधान के लिए बीच का रास्ता निकाल रहा है। परिवहन विभाग के अनुसार यदि शहर में ई-रिक्शाओं का संचालन एक मजबूत एसोसिएशन के माध्यम से होता है तो एसोसिएशन को काफी हद तक परिवहन विभाग की ओर से भी मदद मिलना तय है। इसमें सबसे खास बात यह रहेेगी एसोसिएशन को ही फार्म 21 और 22 का भी अधिकार रहेगा।
जिले में बढ़ते ई रिक्शा के साथ ही उन्हें पंजीकृत कराने की समस्या बढ़ती जा रही है। पिछले एक वर्ष से परिवहन विभाग द्वारा इन्हें पंजीकृत कराने के प्रयास जारी हैं। हालांकि केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार ई रिक्शा के पंजीकरण की असली जिम्मेदारी खुद ई रिक्शा चालकों की ही है।
चालकों को शोषण से बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक वर्ष पहले दिशा निर्देश जारी किए गए थे। इनके अनुसार ई रिक्शा के पंजीकरण का दायित्व चालकों पर ही है। इसके लिए उन्हें एसोसिएशन बनानी होगी। एक वर्ष बीत जाने के बाद जिले में मौजूद 4000 से भी अधिक ई रिक्शा में से मात्र 150 ही पंजीकृत हो पाए हैं।
शहर में भारी मात्रा में ई-रिक्शाओं का संचालन हो रहा है, इनमें कई का तो पंजीकरण विभाग की ओर से हो चुका है और शेष का पंजीकरण होना है। ऐसे में यदि शहर या जिले में एक मजबूत एसोसिएशन रजिस्टर हो जाए तो विभाग भी उसे मदद करने को तैयार है, वरना नियमों का उल्लंघन करने वालों पर विभाग कार्रवाई करेगा।
- नंद किशोर, एआरटीओ प्रशासन, रुद्रपुर।