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पूर्वी सिक्किम में सेना का वाहन खाई में गिरा, काशीपुर का लाल शहीद

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काशीपुर। पूर्वी सिक्किम में गंगटोक-नाथुला मार्ग पर सेना का वाहन खाई में गिरने से कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात जवान काशीपुर निवासी हिमांशु नेगी शहीद हो गए। उनकी शहादत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। शहीद जवान का पार्थिव शरीर शुक्रवार देर रात तक काशीपुर पहुंचने की संभावना है।
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हेमपुर डिपो की पांडेय कॉलोनी निवासी हिमांशु नेगी की नियुक्ति 27 मार्च 2019 को 7-कुमाऊं रेजीमेंट में बतौर सिपाही हुई थी। जम्मू कश्मीर में रहने के बाद वह वर्तमान में पश्चिमी बंगाल की बीनागुड़ी पोस्ट पर तैैनात थे। 45 दिन का अवकाश पूरा करने के बाद हिमांशु दो जून को ही ड्यूटी पर लौटे थे।
बुधवार सुबह 11 बजे रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर ने हिमांशु की शहादत की खबर उसके परिजनों को दी। शहीद नेगी के पिता हीरा सिंह ने बताया कि दुर्घटना 30 जून सुबह करीब साढ़े आठ बजे न्यू जवाहरलाल नेहरू मार्ग रोड पर हुई। यह मार्ग गंगटोक को सोमगो झील और भारत-चीन सीमा पर नाथुला से जोड़ता है। हादसे में शहीद और घायल हुए कुमाऊं रेजीमेंट के छह जवान सेना के ट्रक में सवार थे।
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ये गंगटोक की तरफ जा रहे थे कि 17 मील के निकट वाहन असंतुलित होकर 600 फीट गहरी खाई में जा गिरा। दुर्घटना में चालक समेत चार जवान शहीद हो गए। सेना, बीआरओ और पुलिस ने वहां के लोगों की मदद से खराब मौसम के बीच अभियान चलाकर शहीद जवानों के शवों को खाई से बाहर निकाला। पिता हीरा सिंह ने बताया कि शुक्रवार देर रात तक बेटे का शव काशीपुर लाए जाने की उम्मीद है।
जन्मदिन पर घर पहुंचेगा का शहीद हिमांशु का शव
काशीपुर। दो जुलाई को शुक्रवार के दिन शहीद जवान हिमांशु नेगी का 21वां जन्मदिन है और इसी दिन उनका शव उनके घर पहुंचेगा। सैन्य सूत्रों के अनुसार शुक्रवार दोपहर एक बजकर 50 मिनट पर बागडोगरा से शहीद का शव सेना के विशेष विमान से दिल्ली लाया जाएगा। शाम सात बजे दिल्ली एयरपोर्ट से जवान का शव एंबुलेंस से काशीपुर स्थित हेमपुर डिपो के पास पांडेय कॉलोनी पहुंचेगा। शनिवार को सैन्य सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
ऊंचे सपने दिखाकर परिवार को बेसहारा छोड़ गया हिमांशु
काशीपुर। बच्चों की तालीम और रोजगार की तलाश में पहाड़ से पलायन कर हेमपुर में आकर बसे हीरा सिंह को बेटे के सेना में भर्ती होने के बाद अपने परिवार के हालात सुधरने की आस जगी थी। तंगहाली से जूझ रहे मां-बाप और भाई-बहनों की आंखों में हिमांशु ने तमाम उम्मीदें जगाई थीं। रुंधे गले से पिता हीरा सिंह अब यही कह रहे हैं बहुत बड़े-बड़े सपने दिखाकर परिवार को बेसहारा छोड़कर चला गया हिमांशु।
मूल रूप से ग्राम मसमोली, तहसील स्यालदेह (अल्मोड़ा) निवासी हीरा सिंह नेगी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने और रोजगार की तलाश में काशीपुर आकर बस गए थे। सात साल पहले उन्होंने पांडे कॉलोनी में मकान बनाया। एक बिल्डर के यहां चार हजार रुपये की पगार पर नौकरी की। परिवार की गाड़ी चलाने के लिए पत्नी कमला ने भी मजदूरी की। चार बच्चों के अलावा 90 साल की बूढ़ी मां सरुली देवी की देखरेख की जिम्मेदारी भी इस दंपती ने बखूबी निभाई।
छोटा बेटा चंदन पूरी दिव्यांग है, मझले बेटे वीरेंद्र के भी हाथ में रॉड पड़ी है। बेटी दीपा रामनगर महाविद्यालय से बीएससी प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही है। बड़े बेटे हिमांशु के सेना में भर्ती के बाद परिवार की स्थिति में कुछ सुधार आया था। दो साल से बेटा परिवार का सहारा बना हुआ था। हीरा सिंह ने बताया कि उनके पिता जय सिंह नेगी सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) में तैनात थे।
जब वह (हीरा सिंह) नौ माह के थे तभी उनके पिता भी ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे। तब से परिवार ने परेशानियां झेली हैं। बेटा हिमांशु 17 अप्रैल को 45 दिनों की छुट्टी पर आया तो कहने लगा कि पापा यह मकान बेच दो, हम ऐसा मकान बनाएंगे, जैसा फौजियों का होता है। वह अपनी बहन दीपा को भी सेना की पुलिस में भर्ती कराने का इच्छुक था।
छुट्टी के दौरान इसके लिए उसने बहन को ट्रेनिंग भी दी थी। साथ ही सेना पुलिस के लिए उसने दीपा का रजिस्ट्रेशन भी कराया था। हीरा सिंह ने बताया कि हिमांशु ही परिवार का इकलौता सहारा था। उसकी मौत से परिवार की सारी उम्मीदें धूमिल हो गई हैं।
सेना में घातक कमांडो बनना चाहता था हिमांशु
काशीपुर। हिमांशु की इच्छा सेना में घातक कमांडो बनने की थी। इसके लिए वह लगातार अभ्यास कर रहा था। हिमांशु का कहना था कि कमांडो का काम बेहद रोमांचकारी होता है। खतरों से खेलने में उसे आनंद आता है। ऐसे में उसकी इच्छा एनएसजी में घातक कमांडो बनने की है ताकि सीमा की सुरक्षा में अपना योगदान दे सके।
हिमांशु की प्रेरणा से पांडे कॉलोनी के तीन युवा हुए भर्ती
काशीपुर। पांडे कॉलोनी के प्रधान धर्मेंद्र ने बताया कि हिमांशु बहुत ही मिलनसार और सहयोगी प्रवृत्ति का था। कुमाऊं रेजीमेंट में भर्ती होने के बाद उसने कॉलोनी के कई युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया। वह कॉलोनी के युवाओं को ट्रेनिंग के लिए अपने साथ पीरूमदारा एकेडमी में ले जाता था। छुट्टी आने पर वह युवाओं को सेना में भर्ती के टिप्स देता था। ग्राम प्रधान ने बताया कि हिमांशु की प्रेरणा से कॉलोनी के परमजीत सिंह, अनुज और अजय सिंह भी सेना में भर्ती हो गए। कई और युवा भी फौज की तैयारी कर रहे हैं।
हादसे से पहले व्हाट्सएप स्टेटस पर अपलोड किया था वीडियो
काशीपुर। सेना की गाड़ी से गंगटोक की ओर रवाना होते समय हिमांशु ने अपना वीडियो व्हाटसएप पर अपलोड किया था। हादसा सुबह करीब नौ बजे का बताया जा रहा है। जबकि वीडियो साढ़े आठ बजे अपलोड किया गया है। वीडियो में हिमांशु मस्ती के अंदाज में गाड़ी की खिड़की से कूद रहा है।
शहीद के घर जाने के लिए है पक्के रास्ते की दरकार
काशीपुर। शहीद हिमांशु का घर हेमपुर की पांडे कॉलोनी में जिस स्थान पर है वहां के लिए हेमपुर रोड से लिंक मार्ग जाता है जो कच्चा है। ग्राम प्रधान धर्मेंद्र ने बताया कि लिंक मार्ग को पक्का बनाने के लिए मंजूरी मिल गई है, जल्द ही मार्ग बन जाएगा। लेकिन इसी मार्ग से शहीद के घर तक जाने वाला रास्ता कच्चा है, जिसमें बरसात के समय जलभराव होता है। इस मार्ग के पक्का बनने से शहीद के परिवार के साथ ही अन्य लोगों को भी सुविधा होगी।
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