मशरूम खाने में स्वादिष्ट होने के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। किचन गार्डन जैसी छोटी सी जगह में भी इसकी खेती हो सकती है। इसकी पैदावार से लोग अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। मशरूम एंटी-ऑक्सीडेंट्स, प्रोटीन, विटामिन डी और जिंक से भरपूर होता है। इसका उपयोग दवाइयां बनाने के लिए भी किया जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व लोगों को खतरनाक बीमारियों से बचाते हैं। मशरूम के सेवन लोगों का इम्यून सिस्टम (प्रतिरोधक तंत्र) भी मजबूत होता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीतेंद्र क्वात्रा ने कहा कि ढींगरी प्रजाति का मशरूम घर में भी उगाया जा सकता है। इस किस्म में में बीटा ग्लाइसीन और लिनॉलिक एसिड होता है, जो प्रोस्टेट और स्तन कैंसर के खतरे को कम करता है। मशरूम का सेवन करने से वजन कम करने में मदद मिलती है। मशरूम को उबालकर नाश्ते में शामिल किया जा सकता है। किचन गार्डन में ढींगरी मशरूम 35 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर भी एक ही बैग में कम स्थान पर उगाया जा सकता है।
गेहूं के भूसे में भी हो सकती है मशरूम की खेती
काशीपुर। कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीतेंद्र क्वात्रा ने बताया कि भूसे को उपचारित करने के बाद इसे पॉलिथीन में बंद कर के रख देते है। इसके उत्पादन के लिए भूसा, पॉलिबैग, कार्बेंडाजिम, फार्मेलिन और स्पॉन (बीज) की जरूरत होती है। 10 किलो भूसे के लिए एक किलो स्पॉन (बीज) की जरूरत होती है। 25 से 30 दिन के बाद इसका उत्पादन प्रारंभ हो जाता है। मशरूम के उत्पादन के लिए जमीन होना आवश्यक नहीं है, इसे घरों में उगाया जा सकता है। ढींगरी मशरूम की खेती छोटे स्तर पर अपनाकर छोटे एवं सीमांत कृषक भी अपनी आय बढ़ा सकते हैं।