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कुमाऊं में कृषि भूमि की उर्वरा पड़ी कमजोर 

Fri, 17 May 2019 11:58 PM IST
अरुण कुमार अमर उजाला ब्यूरो 
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farmar - फोटो : amar ujala
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अधिक उत्पादन के लालच में रसायनिक खाद एवं उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से कुमाऊं भर में कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर पड़ती जा रही है। कुमाऊं के सभी छह जिलों से पिछले दो वर्षों में लिए गए मिट्टी के नमूनों की जांच रिपोर्ट में मुख्य पोषक तत्वों की भारी कमी मिली है। भूमि परीक्षण मंडलीय प्रयोगशाला की नई रिपोर्ट में मिट्टी के कुल 68 हजार 963 नमूनों में से 30 हजार 965 में प्रमुख पोषक तत्व नाइट्रोजन की मात्रा न्यूनतम स्तर पर मिली है। 

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वर्ष 2016-17 और 2017-18 में कुमाऊं के सभी छह जिलों से कृषि भूमि में पोषक तत्वों की जांच के लिए 68 हजार 963 मिट्टी के नमूने जांच के लिए भूमि परीक्षण मंडलीय प्रयोगशाला में भेजे गए थे। इन नमूूनों की द्विवार्षिक रिपोर्ट आ गई है। जांच रिपोर्ट में कृषि भूमि में मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन की मात्रा 44 प्रतिशत कम मिली है, जबकि राज्य के प्रमुुख कृषि उत्पादक जिले ऊधम सिंह नगर में यह आंकड़ा 64 प्रतिशत कम है, जो कि कृषि उत्पादन के लिए चिंता का विषय है।

अन्य मुख्य पोषक तत्वों फास्फोरस और पोटैशियम के साथ ही सूक्ष्म पोषक तत्वों में मिट्टी में बोरोन की मात्रा कम मिली है। ऊधम सिंह नगर से भरे मिट्टी के 43,017 नमूनों में से 29,037 नमूनों में बोरोन सर्वाधिक कम मात्रा में मिली है, जो कि करीब 67 प्रतिशत कम है। बोरोन के साथ ही कुमाऊं के सभी जिलों की कृषि भूमि में सूक्ष्म पोषक तत्वों जिंक, आयरन, मैंगनीज, सल्फर, कॉपर की मात्रा भी कम मिली है। इस द्विवार्षिक रिपोर्ट से कृषि विभाग के अधिकारियों के माथे पर बल पड़ गये हैं। द्विवार्षिक रिपोर्ट को जल्द कृषि निदेेेशालय एवं केंद्रीय कृषि मंत्रालय को भेजा जाएगा। 
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मिट्टी में मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन की कमी
जिला - कुल नमूने        कम पोषक तत्व वाले नमूने 
यूएस नगर    43,017                27,557
नैनीताल    8,637                1212
अल्मोड़ा    8,005                1378
पिथौरागढ़    3,851                337
बागेश्वर    2,492                389
चंपावत    2,961                92

मिट्टी के मुख्य पोषक तत्वों के मानक
रुद्रपुर। कृषि भूमि में खेती के मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश होते हैं। इन पोषक तत्वों की कमी से पौधों की वृद्धि रुकना, तनें का कमजोर व पीले पड़ना व बीज पकने से पहले गिरने लगते हैं। कृषि भूमि में फसल के लिए मिट्टी में 10 से 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर फास्फोरस व 120 से 280 किग्रा प्रति हेक्टेयर पोटाश होनी चाहिए। जबकि कुल ऊपजाऊ भूमि में 0.5 से 0.75 प्रतिशत तक नाइट्रोजन होनी चाहिए।


कृषि भूमि के नमूनों की द्विवार्षिक जांच रिपोर्ट में मुख्य एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा कम मिली है। कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने को लेकर यह रिपोर्ट भारत सरकार के कृषि मंत्रालय को भेजी जाएगी। इसके बाद कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए जरूरी प्रयास किए जाएंगे। - मो. ताहिर, सहायक निदेशक, भूमि परीक्षण मंडलीय प्रयोगशाला। 

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