भूमि उपयोग बदलने से ही काशीपुर तहसील की 30 प्रतिशत से अधिक भूमि कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो गई है। इससे कृषि क्षेत्र सिमट गया है। अधिकारियों की मिलीभगत से मानकों को ताक में रखकर अवैध कॉलोनियां बनी हैं। प्रॉपर्टी डीलर मकान बनाने के लिए 143 करने के बाद प्लॉटिंग कर भूमि बेच रहे हैं। इस अवैध कारोबार से करोड़पति बन गए, लेकिन सरकार को एक रुपये का भी राजस्व नहीं मिल रहा। अगर अवैध तरह से भूमि उपयोग की जांच की जाए तो कई अधिकारी चपेट में आएंगे।
कभी तराई को फसल उत्पादन में मिनी पंजाब कहा जाता था, लेकिन राज्य गठन के बाद प्रॉपर्टी डीलरों की एक जमात खड़ी हो गई। लोग अन्य कारोबार छोड़ गांवों में सस्ते में कृषि भूमि खरीद कर अधिकारियों से मिलकर भूउपयोग बदल रहे हैं। मानकों को ताक में रखकर बना प्लॉटिंग की जा रही है। काशीपुर तहसील क्षेत्र में मात्र एक दर्जन रजिस्टर्ड कॉलोनी है जो मानकों पर बनी है। प्रॉपर्टी डीलर खरीदार को भूखंड बेच देते हैं। मकान खरीदार स्वयं बनाता है। इन कॉलोनियां में पर्याप्त चौड़ाई के रास्ते, सार्वजनिक स्थान, मंदिर, सीवर लाइन की कोई व्यवस्था नहीं होती।
अधिकांश बड़े गांवों में प्रॉपर्टी डीलरों ने कॉलोनियां बनाने के लिए भूमि खरीदकर 143 कराकर बंजर छोड़ दी है, जो नोटबंदी के कारण कम बिक रही हैं। काशीपुर-कुंडेश्वरी मार्ग, काशीपुर-जसपुर मार्ग, काशीपुर-रामनगर मार्ग, काशीपुर-अलीगंज मार्ग, काशीपुर- दढ़ियाल मार्ग पर करीब साठ प्रतिशत भूमि प्लॉटिंग के लिए भूमि बिक चुकी है। कागजों मे अकृषि हो गई है। अगर कृषि भूमि की 143 नहीं दी जाती तो भूमि इस कदर नहीं बिकती। इतना ही नहीं नियमानुसार नदी के तट से 200 मीटर दूर तक निर्माण नहीं हो सकता है, लेकिन यहां ढेला नदी के किनारे कॉलोनियां कट गई हैं। मकान भी बन गए।