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Udham Singh Nagar News: उम्र बढ़ी, सहूलियतें नहीं... बुजुर्ग आज भी लाइन में

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रुद्रपुर। शहर की आबादी के साथ बुजुर्गों की संख्या भी बढ़ी है लेकिन उनके लिए सुविधाएं नहीं बढ़ सकीं। सरकारी अस्पताल, बस और सरकारी दफ्तरों में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को घंटों लाइन लगानी पड़ रही है। जिला अस्पताल में बुजुर्गों के लिए अलग काउंटर बना है लेकिन वह भी अक्सर बंद रहता है।
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ओपीडी, दवा और जांच के लिए सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। व्हीलचेयर और स्ट्रेचर खिंचने तक वाला कोई नहीं है। रोडवेज में आरक्षित सीटों पर कब्जा रहता है। कोतवाली-चौकियों में सीनियर सिटिजन हेल्प डेस्क है पर रजिस्ट्रेशन बहुत कम हुए हैं। ऊधमसिंह नगर जिले में पेंशन में केवाईसी और जीवित प्रमाण पत्र की वजह से करीब 400 बुजुर्गों की पेंशन महीनों से अटकी है।
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बेटे दिल्ली रहते हैं। पेंशन के लिए तीन बार तहसील के चक्कर लगा चुका। बैंक में कोई फॉर्म भरने वाला नहीं मिलता। तीन महीने से पेंशन नहीं आई। -रामलाल, 72 वर्ष, गल्ला मंडी।
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अस्पताल में सुबह तीन बजे से लाइन लगाती हूं। बुजुर्गों का काउंटर बंद रहता है। दवा लेने के लिए दो मंजिल सीढ़ी चढ़नी पड़ती है। घुटनों में दर्द है लेकिन मजबूरी में जाना पड़ता है। -शांति देवी, 68 वर्ष, ट्रांजिट कैंप

बस में बुजुर्गों की सीट पर जवान बैठ जाते हैं। ऑटो वाले 20 रुपये की जगह 50 रुपये मांगते हैं। उम्र अधिक होने के कारण घर से निकलने से पहले डर लगने लगता है। -हरपाल सिंह, 75 वर्ष, काशीपुर रोड

आयुष्मान कार्ड बनवाने गई तो ऑनलाइन कराने को कहा। मुझे कंप्यूटर नहीं आता। बेटी को छुट्टी लेकर आना पड़ा। सरकार कहती है सब ऑनलाइन पर हम जैसे बुजुर्ग जाएं तो कहां जाएं। -सुमित्रा रावत, 70 वर्ष, आवास विकास

कोट
बुजुर्गों के लिए सरकारी कार्यालयों में अलग काउंटर की व्यवस्था रहती है। अस्पताल और अन्य संस्थानों में भी इसी तरह की सुविधाएं दी जाती हैं। कहीं इसकी अनदेखी हो रही होगी तो जांच के बाद दुरुस्त कराया जाएगा। पेंशन प्रकरण की भी जांच की जाएगी। -पंकज उपाध्याय, एडीएम
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