रुद्रपुर। भले ही सूबे के स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत अस्पतालों में डॉक्टर सरप्लस होने के बयान दे रहे हों, हकीकत में मरीज सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों को खोज रहे हैं। यानि कि अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक हैं, ही नहीं। ऊपर से तुर्रा यह कि ऊंची पहुंच का लाभ उठाते हुए संबद्धता का खेल चल रहा है, जो जन स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है। जिले के दो डॉक्टर लंबे समय से हरिद्वार से संबद्ध हैं।
सीेएमओ कार्यालय में तैनात एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) की चिकित्सक डाॅ. प्रियंका बंसल करीब दो साल से सीएमओ कार्यालय हरिद्वार से संबद्ध हैं। उनका वेतन इस जिले से आहरित हो रहा है। आईडीएसपी चिकित्सक पर संचारी रोग (डायरिया, मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड) के साथ ही महामारी जैसी स्थितियों की पहचान और निगरानी का जिम्मा होता है।
दूसरा मामला राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरा का है। बरा अस्पताल के चिकित्साधिकारी अक्षय कुमार चौहान को भी हरिद्वार के सीएमओ कार्यालय से संबद्ध किया गया है। डॉक्टर की तैनाती होने के बाद भी बरा अस्पताल चिकित्सक विहीन चल रहा है। इस कारण लोगों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही है। संवाद
-इंसेट:
एसडीएच बाजपुर के सीएमएस, गायनी मुख्यालय संबद्ध
जिले में भी डॉक्टरों की संबद्धता का खेल चल रहा है। करीब दो साल पहले उप जिला अस्पताल बाजपुर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पंकज माथुर को सीएमओ कार्यालय से और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मधु माथुर को जिला अस्पताल से संबद्ध कर दिया गया। इसके पीछे विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि डॉ. माथुर को तब हुए विवाद में जानमाल की धमकी मिली थी। आज तक दोनों यहीं सेवा दे रहे हैं। डॉ. पंकज माथुर तो आगामी 30 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। विभाग ने इस लंबी अवधि में बाजपुर अस्पताल में सीएमएस और स्त्री रोग विशेषज्ञ की व्यवस्था नहीं की। उप जिला अस्पताल सितारगंज के सीएमएस डाॅ. राजेश कुमार भी पीएचसी नारायणपुर से संबद्ध हैं।
पहाड़ से मैदान उतार दिए डाॅक्टर
संबद्धता के खेल से स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली झेल रहे राज्य के पहाड़ी इलाके भी अछूते नहीं हैं। बीते सितंबर में स्वास्थ्य महानिदेशालय ने डॉ. रोहन कुमार का स्थानांतरण बागेश्वर के जिला अस्पताल में किया। बागेश्वर की जनता डॉक्टर का इंतजार करती रही, डॉक्टर यूएस नगर के राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शक्तिफार्म में संबंद्धता का आदेश ले आए। यानि कि वेतन पहाड़ी जिले से ले रहे हैं, सेवाएं सुविधा मैदानी इलाके में दे रहे हैं।
-कोट:
सभी सीएमओ से डॉक्टरों की संबद्धता पर रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट का परीक्षण कर औचित्यपूर्ण संबद्धता के मामलों को छोड़कर अन्य चिकित्सकों को मूल तैनाती स्थल में भेजा जाएगा। बाजपुर उप जिला अस्पताल से सीएमएस और स्त्री रोग विशेषज्ञ को वहां हुए विवाद के कारण संबद्ध करने की बात सामने आई है।
-डॉ. सुनीता टम्टा, स्वास्थ्य महानिदेशक उत्तराखंड