ऊधम सिंह नगर में खप रहे दूध में मिलावट हो रही है या नहीं, इसका सबूत अब लैब रिपोर्ट से नहीं, सीधे गणित से मिल रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़ों ने ही मिलावटखोरों की पूरी कहानी बयां कर दी है।
जिले में रोजाना 70 हजार लीटर दूध आ रहा है, जिसमें से 42 हजार लीटर सीधे दूध के रूप में खप रहा है। बाकी 28 हजार लीटर बच रहा है। विभाग का दावा है कि इसी बचे हुए 28 हजार लीटर से रोज 20 क्विंटल पनीर और 15 क्विंटल खोवा बनाया जा रहा है। सवाल ये उठ रहा है कि अगर 62 रुपये लीटर वाले शुद्ध दूध से ही पनीर-खोया बनाया जाए तो सिर्फ पनीर-खोये के लिए 19,500 लीटर दूध की लागत 12.09 लाख रुपये बैठती है। जबकि बाजार में 20 क्विंटल पनीर (300 रु/किलो से छह लाख) और 15 क्विंटल खोवा (350 रु/किलो से 5.25 लाख) यानी कुल 11.25 लाख में बिक रहा है। मतलब शुद्ध माल बनाने पर 84,000 रुपये का सीधा घाटा है। ऊपर से कारीगर, किराया, बिजली, ट्रांसपोर्ट का खर्च अलग से। फिर दुकानदार कमा कैसे रहा है? इसका एक ही जवाब है कि मिलावट। बचे हुए 8,500 लीटर को फेंका नहीं जाता, बल्कि 28,000 लीटर में ही पानी, सिंथेटिक पाउडर, यूरिया मिलाकर उसे 40-45 हजार लीटर बना लिया जाता है। पनीर में स्टार्च-पाम ऑयल और खोये में मैदा-सूजी मिलाकर वजन बढ़ा दिया जाता है, तब जाकर लागत छह लाख आती है और पांच लाख का मुनाफा होता है।
शुद्धता का गणित
प्रोडक्ट - बाजार में रोज की खपत एक किोलो/लीटर का रेट एक किलो बनाने में दूध कुल दूध की जरूरत
दूध - 42,000 लीटर - 62 रु/लीटर - - 42,000 लीटर
पनीर - 20 क्विंटल (2000 किलो) - 300 रु/किलो - छह लीटर - 12,000 लीटर
खोया - 15 क्विंटल (1500 किलो) - 350 रु/किलो - पांच लीटर - 7,500 लीटर
(नोट- 70,000 लीटर आवक में से 61,500 लीटर का हिसाब मिला तो भी 8,500 लीटर दूध बच रहा है।)
आम आदमी कैसे पहचाने असली-नकली?
पनीर की पहचान: असली पनीर को हाथ से दबाने पर टूट जाता है और हल्का चिकना लगता है। नकली पनीर रबर जैसा खिंचता है। पनीर पर आयोडीन टिंचर डालें, अगर नीला-काला हो जाए तो उसमें स्टार्च मिला है। उबालने पर अगर बहुत ज्यादा तेल छोड़े तो पाम ऑयल की मिलावट है।
खोया की पहचान: असली खोया जीभ पर रखते ही घी की तरह पिघल जाता है और मीठी खुशबू देता है। नकली खोया मुंह में चिपकेगा, कड़वा या खट्टा लगेगा। हाथ पर रगड़ने से अगर मैदा जैसा सफेद निशान छोड़े तो मिलावट है।
दूध की पहचान: चिकनी सतह पर एक बूंद डालें, असली दूध धीरे बहेगा और सफेद लकीर छोड़ेगा, पानी वाला दूध तेजी से बह जाएगा।
मिलावटी मिठाई, दूध, पनीर और खोया खाना सेहत के लिए हानिकारक है। इंसान कोई भी मिलावटी खाद्य सामग्री खाता है तो वह धीमे जहर का ही काम करता है। डा. एसके गोस्वामी, सीएमओ।
खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार सीमाओं से आने वाले वाहनों की तलाशी कर रहा है। साथ ही बाजार में मिठाई की दुकान, डेयरी और अन्य प्रतिष्ठानों पर चेकिंग की जा रही है। सैंपलों को जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है।
-ललित मोहन पांडेय, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग।