रुद्रपुर। साइबर ठगी की जद अब केवल पीड़ित व्यक्ति तक ही सीमित नहीं रही। कभी-कभी यह उन निर्दोष लोगों को भी लपेटे में ले रही है, जिनकी खता सिर्फ इतनी है कि उन्हें ठगी में इस्तेमाल खाते से भुगतान मिला होता है।
ठग जब किसी का अकाउंट खाली करते हैं तो जांच एजेंसियां उस रकम की ट्रेल खंगालते हुए कई ऐसे खातों को भी फ्रीज कर देती हैं, जिनका इस अपराध से कोई वास्ता नहीं होता। जिले में धीरे-धीरे ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें दूसरे राज्यों की पुलिस ने साइबर ठगी के मामलों में खाते फ्रीज करवाए हैं।
साइबर ठग निवेश में मोटे मुनाफे का लालच, डिजिटल अरेस्ट सहित तमाम तरीके से लोगों को झांसे में लेकर उनके खाते खाली कर रहे हैं। पीड़िताें की शिकायत पर साइबर पुलिस छानबीन के बाद ठगी की रकम को ट्रांसफर करने में प्रयुक्त खातों को फ्रीज कर देती है।
कई बार समय से सूचना मिलने पर फ्रीज खातों से पीड़ित को रकम भी वापस मिल जाती है लेकिन फ्रीज होने से पहले ठगी में इस्तेमाल खाते से किसी को भुगतान किया जाता है तो वह खाता भी फ्रीज कर दिया जाता है।कई बार अकाउंट में भारी रकम होने की वजह से भी लोगों को खाता अनफ्रीज होने तक बेवजह तनाव और परेशानी झेलनी पड़ती है। संवाद