लाइसेंस रिन्यूवल के नाम पर रिश्वत लेते ड्रग इंस्पेक्टर को विजीलेंस की टीम ने रंगे हाथ धर दबोच लिया। ड्रग इंस्पेक्टर पिछले लंबे समय से दवा व्यवसायी से लाइसेंस रिन्यूवल कराने के लिए घूस मांग रहा था। सीएमओ कार्यालय में विजीलेंस टीम के पहुंचते ही हड़कंप मच गया।
हल्द्वानी निवासी रविंद्र कुमार शर्मा हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल के निकट दवाई का कारोबार करते हैं। बताया जा रहा है कि दवा व्यवसाय से संबंधित लाइसेंस का रिन्यूवल कराने के लिए उन्होंने ड्रग इंस्पेक्टर दीपक कुमार से मिले। उसने 27 हजार रुपये की रिश्वत मांगी।
रिश्वत नहीं देने पर लाइसेंस नवीनीकरण के लिए उन्हें टरकाया जाने लगा। व्यवसायी का का आरोप है कि इस बीच उन्होंने ड्रग इंस्पेक्टर को तीन हजार रुपये लाइसेंस नवीनीकरण के लिए दे भी दिए, लेकिन इसके बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
ड्रग इंस्पेक्टर के कारनामों से उन्होंने विजीलेंस को भी अवगत करा दिया। जिसके बाद ड्रग इंस्पेक्टर पर शिकंजा कसने की रणनीति बनाई गई। दवा कारोबारी रविंद्र कुमार ने ड्रग इंस्पेक्टर को फोन कर रिश्वत की रकम लेने की पेशकश की, जिस पर दीपक ने शुक्रवार को उन्हें सीएमओ कार्यालय स्थित अपने दफ्तर में बुला लिया। एसपी विजीलेंस अमित कुमार श्रीवास्तव की अगुवाई में पहुंची विजीलेंस की टीम ने घूसखोर ड्रग इंस्पेक्टर को रंगे हाथ धर दबोचा।
झोलाछाप डाक्टरों के भी बना दिए लाइसेंस
जनस्वास्थ से खिलवाड़ करने के मामले में तत्कालीन एसएसपी केवल खुराना ने जिलेभर के झोलाछाप डाक्टरों के खिलाफ अभियान चलाकर तीन दर्जन से ज्यादा लोगों के चालान काटे थे। अकेले रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप क्षेत्र से 19 झोलाछाप डाक्टरों को जेल भेजा गया था। जेल से छूटने के बाद उन्होंने जब मेडिकल लाइसेंस के लिए आवेदन किया तो उन्हें भी लाइसेंस दे दिया गया। बताया जा रहा है कि जिलेभर में मेडिकल लाइसेंस के नाम पर बड़ा खेल खेला जा रहा है। मेडिकल स्टोर लाइसेंस बनाने के खूब दाम वसूले जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो एक मेडिकल लाइसेंस बनाने के लिए तीस हजार रुपये की घूस ली जा जाती है। इतना ही नहीं जिन झोलाछाप डाक्टरों को तत्कालीन एसएसपी खुराना ने जेल की हवा खिलाई थी, उनमें अधिकांश आज मेडिकल स्टोर संचालक बन गए हैं।
2008 में भी पकड़ा गया था एक ड्रग इंस्पेक्टर
रुद्रपुर। वर्ष 2008 में हल्द्वानी निवासी ड्रग इंस्पेक्टर गौरव सिंह को घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। लाइसेंस बनाने के एक मामले में उन पर घूस मांगने का आरोप लगा था। शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत विजीलेंस से की थी। तब ड्रग इंस्पेक्टर गौरव सिंह ने व्यवसायी को हल्द्वानी स्थित आवास पर बुलाया था। घर पर पहुंची विजीलेंस टीम ने गौरव सिंह को रिश्वत लेते रंगे हाथ धर दबोचा था।