झनकट। देवरी क्षेत्र में लंबे समय से पशु चिकित्सालय खोलने की मांग अबतक अधूरी है। इस कारण देवरी समेत क्षेत्र के 12 गावों के पशुपालकों को अपने दुधारू पशुओं के इलाज के लिए करीब सात किलोमीटर दूर ले जाना पड़ रहा है।
देवरी समेत आसपास के करीब 12 गांवों में बसे अधिकतर लोगों की आजीविका पशुपालन और दुग्ध उत्पादन पर निर्भर है। पशुओं के बीमार होने पर ग्रामीणों को इलाज के लिए करीब सात किलोमीटर दूर झनकट पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि दियां गांव में पशु चिकित्सालय है, लेकिन वह अक्सर बंद ही मिलता है। बताया कि मवेशियों को वैक्सीन तक लगवाने के लिए उन्हें झनकट जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पशुपालन उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत है, ऐसे में पशु चिकित्सालय की सुविधा जल्द शुरू होनी चाहिए।
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क्या कहते हैं ग्रामीण
यशोदा कोटिया कहती हैं कि गांव के निकट कोई पशु चिकित्सालय न होने से पशुपालकों को झनकट तक पशुओं को ले जाने में काफी असुविधा होती है। यदि गांव में अस्पताल खुल जाए तो काफी सुविधा मिलेगी। हरीश कुमार बोले, दुधारू पशुओं और अन्य पालतू जानवरों को टीका लगवाने के लिए करीब सात किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। दुधारू पशुओं को पैदल लेकर जाने में काफी असुविधा होती है। मुकेश कुमार के अनुसार दूध बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं। यदि पशु बीमार हो जाए तो उनके इलाज में काफी परेशानी होती है। गांव के निकट पशु चिकित्सालय न होने से ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। हंशी बिष्ट कहती हैं कि हमारे गांव में अधिकतर लोग पशुपालन से जुड़े हैं। गांव के निकट पशु चिकित्सालय न होने से काफी असुविधा हो रही है। पशु बीमार हो जाएं तो इलाज के लिए दूर ले जाना पड़ता है। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है।