रुद्रपुर। ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय पहल के तहत हल्दी उत्पादन और पैकिंग के कार्य से करीब 300 महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से शुरू की गई इस योजना ने न केवल महिलाओं को रोजगार दिया है बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत भी किया है।
इस पहल के तहत सितारगंज महिला बंधन विकास केंद्र से जुड़ी महिलाओं को पहले हल्दी की उन्नत खेती, उसकी सफाई, सुखाने, पिसाई और आधुनिक पैकिंग की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
इसके बाद महिलाओं ने समूह बनाकर कार्य शुरू किया, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार हुआ है। महिलाएं बाजार की मांग के अनुसार शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण हल्दी पाउडर तैयार कर उसे आकर्षक पैकिंग में उपलब्ध करा रही हैं।
- आय का साधन मिला तो आसान हो गई जिम्मेदारियां
हल्दी उत्पादन से जुड़ी महिलाओं को अब नियमित आय का स्रोत मिला है। समूह की अध्यक्ष मंगेश्वरी राणा कहती हैॅं कि पहले जो महिलाएं घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, वे अब अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हो रही हैं। इस आमदनी से बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों को पूरा करना आसान हुआ है। इस परियोजना में स्थानीय प्रशासन और विकास विभाग का भी सहयोग रहा है। महिलाओं को मशीनें, पैकिंग सामग्री और विपणन के लिए मार्गदर्शन दिया गया है। उत्पादों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है, जिससे महिलाओं की आय और बढ़ सके। बताती हैं की महिलाएं घर से घर से हल्दी की खरीदकर समूह की चक्की में ही पीसती हैं। इसके बाद पैकिंग कर स्टॉल और दुकानों पर बिक्री करती हैं।
- वर्जन
हल्दी उत्पादन, पैकिंग और ब्रिकी से महिलाएं सशक्त हो रही हैं। सरकारी सहयोग के अलावा महिलाओं का परिश्रम सराहनीय है। इन महिलाओं को अन्य कई विषयों पर जल्द ही प्रशिक्षण मुहैया कराया जाएगा ताकी इसके अलावा भी अपनी आय का साधन मजबूत कर सकें। -सुशील मोहन डोभाल, डीडीओ