आग की सूचना मिलने के बाद आवास के बाहर लगी भीड़।
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पंतनगर विश्वविद्यालय के प्लांट पैथालोजी विभाग में कनिष्ठ शोध अधिकारी पद पर कार्यरत डॉ. दीपशिखा के सरकारी आवास में दिनदहाड़े आग लग गई। कनिष्ठ शोध अधिकारी एक साल से अवकाश पर हैं। उनका घर तभी से बंद पड़ा है। माना जा रहा है कि चोरों ने बंद पड़े आवास में चोरी करने के बाद सबूत मिटाने के लिए उसमें आग लगाई है।
डॉ.दीप शिखा को पंतनगर विश्वविद्यालय की ओर से नगला डेरी परिसर में आवास संख्या एन-72 आवंटित है। वह पिछले एक साल से मातृत्व अवकाश पर हैं और देहरादून में अपने पति के साथ रह रही हैं। उनके पति सुधीर कुमार केंद्रीय जल आयोग में निदेशक हैं। दोपहर तीन बजे आसपास के लोगों ने दीपशिखा के आवास से धुआं उठते देखा। लोगों ने इसकी सूचना विवि के सुरक्षाधिकारी डॉ.अरविंद सिंह तोमर और पुलिस को दी।
सुरक्षाधिकारी तोमर सुरक्षा कर्मियों के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में आवास का मेन गेट तुड़वाया और आग बुझाने में जुट गए। इसी बीच सिडकुल से पहुंची दमकल ने भी आग को आगे बढ़ने से रोका। आग से ड्राइंग रूम में रखा सोफा सेट और अन्य सामान जल गया। आग बुझाने के बाद जब आवास का निरीक्षण किया गया तो उसमें सामान बिखरा पड़ा था। अलमारियां खुली थीं। आवास के पिछले हिस्से की जाली कटी थी। सुरक्षाधिकारी और पुलिस ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला चोरी का प्रतीत हो रहा है। डॉ.दीपशिखा के पंतनगर आने के बाद ही चोरी गए सामान की जानकारी मिल सकेगी। उधर डॉ.दीपशिखा ने देहरादून से फोन पर बताया कि घर में शैक्षिक प्रमाण पत्र, कपड़े, जूते चप्पल, लकड़ी के सामान आदि ही थे। उन्हें अपने कागजात चोरी होने या जलने की आशंका है।
समझा जाता है कि चोर रात में आवास के पिछले दरवाजे की जाली काटकर उसके सहारे बैडरूम और ड्राइंग रूम तक पहुंचे होंगे। चोरी करने के बाद चोरों ने ड्राइंग रूम में बीड़ी सिगरेट फेंक दी होगी या सबूत मिटाने के लिए उन्होंने सोफे या अन्य सामान में आग सुलगा दी होगी। ऐसी भी संभावना है कि खाली पड़े आवास में जुआरी और शराबी रात में आ जाते हों। थानाध्यक्ष संजय पाठक ने बताया मामले की जांच की जाएगी।