हल्द्वानी। कागजों में खुलने के बाद भी बंद चल रही गौला को शुरू कराने के लिए बृहस्पतिवार को गौला संघर्ष समिति के लोगों ने जुलूस निकाला। समिति ने वित्त मंत्री एवं एसडीएम को ज्ञापन देकर वैट और ट्रांजिट शुल्क पर जल्द फैसला कराने की मांग की।
खनन के लिए 21 नवंबर को गौला खुल गई थी। सात हजार डंपर मालिकों ने वाहनों का टैक्स जमा करने के साथ ही आरटीओ से वाहन रिलीज करा लिए थे, लेकिन ट्रांजिट शुल्क और वैट कम करने की मांग को लेकर स्टोन क्रशर स्वामी ने माल नहीं खरीदने का ऐलान कर दिया, जिस कारण गौला के अधिकांश गेट बंद पड़े हुए हैं। गौला खनन से लगभग 50 हजार मजदूरों को रोजगार मिलता है। खनन शुरू नहीं होने का सीधा नुकसान मजदूरों के साथ ही वाहन स्वामियों और ट्रक ड्राइवरों को भी हो रहा है।
समिति के लोगों का कहना था कि पांच माह गौला में खनन होने से व्यवसाय से जुड़े लोग रोजी-रोटी चलाते हैं। गौला की कमाई से साल भर उनका घर चलता है। क्रशर स्वामियों की मांगें पूरी न होने से खनन व्यवसाय से जुड़े लोगों के आगे रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सरकार को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। समिति ने छोटे-छोटे स्टाकिस्टों को बिना शर्त स्टाक करने की अनुमति देने की मांग की। साथ ही जमरानी, शांतिपुरी से आ रहे बिना रायल्टी के माल पर रोक लगाने और पट्टों से आ रहे माल का केवल एक ही चक्कर निर्धारित करने की बात कही।
समिति ने कहा कि ट्रांजिट और वैट पर अगर शीघ्र फैसला नहीं होता है तो गौला खनन में लगे सात हजार डंपर मालिक और 50 हजार मजदूर सड़क पर उतरेंगे। इस दौरान समिति के अध्यक्ष अरशद अय्यूब, रेहान अंसारी, रईसुल हसन, पम्मी सैफी, मनोज मठपाल, आदिल, गुफरान, बब्लू, डेरी फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष मोहन बिष्ट, बीडी खोलिया, राजेंद्र सिंह बिष्ट, अफजाल अहमद, नफीस गफ्फारी, नसीम, शाकिर आदि थे।वित्त मंत्री।