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नोबेल पुरस्कार विजेता सत्यार्थी से नैनीताल में मिले थे बत्रा और तागरा

Tue, 14 Oct 2014 05:34 AM IST
Udham singh nagar
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रुद्रपुर। मध्य प्रदेश के प्राचीन नगर विदिशा में जन्मे कैलाश सत्यार्थी ने शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त कर देश का मान बढ़ाया है। किशोर न्याय अधिनियम के अंतर्गत प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेटों की न्यायिक पीठ जिला बाल कल्याण समिति सदस्य डा. रजनीश बत्रा और विवेक तागरा ने उन्हें बधाई देते हुए बताया कि कैलाश सत्यार्थी से उनकी मुलाकात छह माह पहले नैनीताल में नैनीताल क्लब में हुई थी। इस दौरान सत्यार्थी जी से उनकी संक्षिप्त बातचीत भी हुई। कैलाश सत्यार्थी नैनीताल में पुलिस, प्रशासन और बच्चों के हितों के संरक्षण के लिए आयोजित सेमीनार में हिस्सा लेने पहुंचे थे। बत्रा ने बताया कि सत्यार्थी बचपन बचाओ आंदोलन के जनक हैं। उन्होंने बाल दासता और बाल मजदूरी के विरुद्ध काफी संघर्ष किया। वे बाल दासता विरोधी विश्व आंदोलन ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर के महानायक हैं। साथ ही विश्व शिक्षा अभियान, ग्लोबल कैंपेन के संस्थापक अध्यक्ष हैं।
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विवेक तागरा ने बताया कि 1978 में उन्होंने विद्युत अभियांत्रिकी में स्नातक किया। लगभग डेढ़ वर्ष तक शिक्षण कार्य किया। लेकिन बच्चों पर हो रहे अन्याय को देखकर बच्चों के हितों के संरक्षण की उन्होंने मन में ठान ली। इसी उद्देश्य को लेकर बाल दासता के कलंक को मिटाने के अभियान की शुरुआत उन्होंने 1980 में की और नौकरी छोड़ दी। उन्हीं को इस बात का श्रेय जाता है कि भारत सहित विश्व के सौ से अधिक देशों में स्वयं जाकर उन्होंने बाल दासता को सामाजिक, राजनैतिक और कानूनी मुद्दा बनाया। 1998 में उन्होंने बाल श्रम विरोधी विश्व यात्रा का आयोजन एवं नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने 80 हजार किमी की यात्रा की। यह यात्रा 103 देशों से होकर गुजरी। इस यात्रा में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति सेराक, भारत के पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन सहित 70 से अधिक देशों के राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों, राजरानियों से भाग लिया। कुल 72 लाख से अधिक बच्चे, महिलाएं और पुुरुष इसमें शामिल हुए। अंतरराष्ट्रीय संगठन के महाधिवेशन में जेनेवा में यह यात्रा पूर्ण हुई। सत्यार्थी के बाल दासता आंदोलन कोे समाप्त करने के लिए एक साल के अंदर ही विश्व भर की सरकारों ने इस कानून पर हस्ताक्षर किए। आज 178 देशों की संसदें किशोर न्याय अधिनियम को पारित कर चुकी हैं। बताया कि 2001 मेें लाखों लोगों को शामिल कर उन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर और दिल्ली होेते हुए 20 राज्यों की 15 हजार किमी की जनजागरण यात्रा की थी। सत्यार्थी को अमेरिकी संसद में दिया गया डिफेंडर फार डेमोक्रेसी सम्मान, इटली की संसद में दिया गया ह्यूमन राइट सीनेट मेडल, अमेरिका सर्वोच्च गैर नागरिक सम्मान, जर्मनी का फ्रेडरिक सम्मान, स्पेन का लॉ हास्पिलेट सम्मान, नीदरलैंड का गोडन फ्लैग अवार्ड व अमेरिका का ट्रंपीटर आदि पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। वे चार बार नोबेल पुरस्कार के लिए भी नामित किए जा चुके थे।
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