खटीमा। वार्ड संख्या सात के एक मकान के दाखिल खारिज का विवाद अदालत में विचाराधीन होने के बावजूद आरोपी पेशकार सतपाल ने वादी मीरा सोनकर से 20 हजार रुपए में दाखिल खारिज करने को कहा। अदालत में विचाराधीन होने के दौरान मामला असंभव मानते हुए पीड़िता ने विजिलेंस की टीम से संपर्क किया और टीम ने ऐसा जाल फैलाया कि पेशकार उनके हत्थे चढ़ गया।
पीड़ित महिला ने बताया कि दो साल पहले उसकी बहन द्वारा मकान के दाखिल खारिज की फाइल लगाई थी। जिस पर उसके द्वारा आपत्ति दाखिल की गई थी। अदालत में मामला विचाराधीन है। जिसकी 19 मई को तारीख थी। उसी दिन पेशकार सतपाल ने कहा कि यदि वह 20 हजार रुपए देती है तो वह दाखिल खारिज करा देगा और अगली तारीख 23 की दे दी। 20 मई को पुन: फोन आने के बाद मीरा सोनकर ने विजिलेंस टीम के इंस्पेक्टर जीमीवाल एवं आर्य से संपर्क किया और वस्तु स्थिति से अवगत कराया। जिस पर टीम ने उसे उनके आने तक रोकने की बात कही। महिला ने उसे 21 मई को एक हजार रुपए दिए और पूरी रकम 23 मई को देने की बात की, लेकिन 22 मई को रुपए की मांग की जाने लगी। पीड़िता ने यह भी कहा कि पेशकार यह कहते हुए रकम जल्दी देने का दबाव बना रहा था कि 30 को तहसीलदार साहब रिटायर हो रहे हैं। वह जाते जाते सस्ते में तुम्हारा काम करते जाऐंगे अन्यथा तुम्हारा मामला हल नहीं होगा। बार-बार काल करने पर सोमवार सायं करीब साढ़े सात बजे पांच हजार रुपए भी दिए और बाकी रकम मंगलवार को देने का वायदा कर दिया।
महिला ने कहा कि मंगलवार को जब वह नानकमत्ता में विजिलेंस टीम के साथ थी उस दौरान भी पैसों की मांग के लिए तहसीलदार के पेशकार का फोन आया तो उसने दो बजे तक आने की बात कही। जिसके बाद ही टीम यहां पहुंची और आरोपी को रंगेहाथ दबोच लिया।