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बिचौलियों के हाथों लुटने को मजबूर काश्तकार

Sat, 13 Apr 2013 05:30 AM IST
Udham singh nagar
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खटीमा। विकास खंड के अंतर्गत गेहूं खरीद केंद्र अभी तक वास्तविक धरातल पर नहीं खुले। कागजों में सहकारिता विभाग के 29, एफसीआई के चार और आरएफसी का एक क्रय केंद्र स्वीकृत है। तैंतीस खरीद केंद्रों में कहीं बैनर तो कहीं कांटे लटके हैं, लेकिन खरीद के नाम पर एडीओ कोआपरेटिव केशव प्रसाद बताते हैं कि अभी वारदाना नहीं पहुंचा है। जबकि एसडीएम हेमंत कुमार शीघ्र केंद्रों के खुलने की बात करते हैं। आरएफसी के एक मात्र केंद्र में 64 कुंतल गेहूं क्रयकर खाता खुल चुका है।
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सरकार की उदासीनता के चलते काश्तकार बिचौलियों के हाथों लुट रहे हैं। काश्तकार खरीद शुरू न होने को लेकर चिंतित ही नहीं अपितु आक्रोशित भी हैं। मंडी परिसर में खुले आरएफसी के अतिरिक्त विकास खंड में खुलने वाले 33 क्रय केंद्र अभी तक नहीं खुले हैं। एफसीआई के एक मात्र क्रय केंद्रों में से मंडी परिसर में कांटा लटका है। कर्मचारी बताते हैं कि गेहूं क्रय केंद्र का बैनर कोई उखाड़ ले गया। कोआपरेटिव के 29 खरीद केंद्रों में से चारूबेटा, टेड़ाघाट, नौसर, कंचनुपरी सहित अन्य में केवल क्रय केंद्रों के बैनर लटके हैं। विभागीय अधिकारी वारदाने का अभाव बताते हैं, लेकिन इन केंद्रों में अभी कांटे बाट तक नहीं लगे हैं। किसान नेता प्रकाश तिवारी इस अव्यवस्था के पीछे सरकारी मशीनरी का हाथ बताते हैं। टेड़ाघाट के वरिष्ठ कृषक गोपाल राटौल, बरि अंजनियां के सुखराम मौर्य, हल्दी पचपेड़ाभजन तलवार, बंडिया राजेंद्र मौर्य, प्रतापपुर के बलकार सिंह आदि बताते हैं कि सीमांत क्षेत्र के काश्तकारों की घोर उपेक्षा होती है। उन्होंने पंजाब पैटर्न पर सुविधा की मांग की है। गेहूं का निर्धारित मूल्य 1350 प्रतिकुंतल निर्धारित होने का लाभ काश्तकार नहीं ले पा रहे हैं। बिचौलियों की गिरफ्त वाले कृषक जहां औने पौने दाम में अपनी उपज कौड़ियों के भाव बेचते हैं वहीं सरकार द्वारा दिए जाने वाले फसल के बोनस से भी वंचित रहते हैं।
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