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पुष्पा से सीखिए दुश्वारियों से लड़ना!

Sat, 13 Apr 2013 05:30 AM IST
Udham singh nagar
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खटीमा। दुश्वारियों से लड़ना पुष्पा से सीखिए। उनके जीवन में कई बाधाएं आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। एक हादसे ने उन्हें अपाहिज बना दिया, मगर उन्होंने शारीरिक कमी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। दोनों पांवों के काम न करने के बावजूद उन्होंने ट्राइसाइकिल से सिलेंडर ढोए। जीवन ने एक बार फिर बीमारी के रूप में उनकी परीक्षा ली। उन्होंने इससे भी पार तो पा लिया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें भारी काम करने से मना कर दिया। इसका भी हल उन्होंने अस्पताल में नौकरी खोजकर निकाला। वह तमाम परेशानियों से जूझकर घर चला रही हैं और बेटे को अच्छी शिक्षा भी दिला रही हैं।
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उमरूखुर्द निवासी 35 वर्षीय पुष्पा 16 वर्ष पहले पेड़ से गिरकर घायल हो गई थीं। रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होने के कारण उनके शरीर का निचला हिस्सा चेतनाशून्य हो गया। इस हादसे के बाद उन्हें सहारे की जरूरत थी तो पति ने भी किनारा कर लिया। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी। किसी संस्था ने पुष्पा को ट्राइसाइकिल दी। उन्होंने ट्राइसाइकिल में ही रोजगार खोज निकाला। वह ट्राइसाइकिल में गैस एजेंसी से लोगों के सिलेंडर भराकर लाती थी। एक सिलेंडर का उन्हें 20 रुपया मिल जाता था। पुष्पा बताती हैं कि दो साल पहले उनके पेट का मेजर आपरेशन हुआ। डॉक्टरों ने भारी काम न करने की सलाह दी। अब वह प्राइवेट अस्पताल में मजदूरी कर बेटे की पढ़ाई का खर्च निकाल रही हैं। उनका बेटा सर्राफ पब्लिक स्कूल में नौवीं का छात्र है। इसके अलावा उन्होंने अपने दम पर मकान भी बनाया है।
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