बरहैनी (बाजपुर)। आखिरकार प्यासे हाथी ने दम तोड़ दिया। सूचना पर वन संरक्षक समेत कई आला अफसर मौके पर पहुंचे। हाथी के दोनों दांतों को काटकर वन विभाग ने सील कर अपने कब्जे में रख लिया है। पोस्टमार्टम के बाद हाथी के शव को दफना दिया गया है। प्रारंभिक जांच में हाथी के 20 दिन से भूखे-प्यासे होने की पुष्टि हुई है।
शनिवार को गांव चनकपुर और कुक्रैंटा के आबादी क्षेत्र से सटे बन्नाखेड़ा वन रेंज के प्लाट संख्या चार स्थित गड्ढे में हाथी बेहोशी की हालत में पड़ा मिला था। वनाधिकारियों और चिकित्सकों की टीम ने हाथी को ग्लूकोज और कैल्शियम की दवा दी थी। वन कर्मियों की टीम ने बल्लियों और ट्रैक्टर की सहायता से हाथी को उठाया। इसके बाद हाथी जंगल की तरफ भाग गया। बताया जाता है कि पांच सौ मीटर चलने के बाद बैलपड़ाब के प्लाट नंबर तीन में एक पेड़ की आड़ लेकर बैठ गया था जहां रविवार सुबह साढे़ छ: बजे उसने दम तोड़ दिया। पशु चिकित्सक डा. सुरेंद्र गर्ब्याल, डा. भारत सिंह, फार्मेसिस्ट कैलाश जोशी की टीम ने हाथी का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद जेसीबी मशीन से गड्ढा खोदकर हाथी उसके शव को दफना दिया गया।
पशु चिकित्सक डा. गर्ब्याल ने बताया कि पानी की कमी और भूखे रहने से हाथी की मौत हुई है। हाथी करीब 25 साल का होगा। खबर मिलते ही वन सरंक्षक डा. राजेंद्र सिंह विष्ट, डीएफओ निशांत वर्मा, डीएफओ पीके पात्रों, एसडीओ आरके वशिष्ठ, रेंजर आनंद बल्लभ पाठक, कर्म सिंह, जगमोहन रावत, लक्ष्मण सिंह विष्ट, अभिलाष सक्सेना, राधेश्याम, पीसी जोशी, आनंद प्रकाश, नंद किशोर आत्मा अध्यक्ष गुरबक्स कांबोज समेत तमाम लोग मौजूद थे।