बाजपुर। इस्लामी कलेंडर में रमजान माह का चांद दिखते ही मस्जिदों में इस माह की विशेष तौर पर पढ़े जाने वाली नमाज (तरावीह) आज से शुरू हो गई है। इसके साथ ही इसी माह में रखे जाने वाले रोजों की तैयारियां भी मुस्लिम समुदाय में पूरी हो गई हैं।
रमजान माह की जानकारी देते हुए मुडिया पिस्तौर मस्जिद-ए-गोशिया के पेश इमामकारी आबिद रजा ने बताया मजहब-ए-इस्लाम में इस महीने की बड़ी अहमियत है, क्योंकि यही वह मुबारक माह है, जिसमें अल्लाह ताला ने आसमान से कुरान शरीफ दुनियों में नाजिल किया। इस माह में मान्यता है कि दोजरा नर्क के दरवाजों को बंद कर दिया जाता है और जन्नत के दरवाजों को खोल दिया जाता है। रमजान माह में जो मोमीन का इंतकाल होता है उससे कब्र में कोई हिसाब-किताब नहीं होता। वह सीधे जन्नत में दाखिल होता है और इस माह में जो मोमीन अल्लाह ताला की राह में एक रुपया खर्च करता है उसको 70 गुणा ज्यादा का सवाब मिलता है। मदरसा गरीब नवाज के सदर मदररिश कारी हिफजुर रहमान ने बताया रोजा अल्लाह के लिए एवं इसकी जजा अल्लाह खुद ही अपने बंदों को देता है। रोजा हर मोमीन मर्द, औरत, आकिल और बालिग पर फर्ज है। उन्होंने तमाम मोमीनों से इस माह ए रमजान के दौरान पाबंदी के साथ ज्यादा से ज्यादा रोजे और नमाज का एहतमाम करने की अपील की है।