काशीपुर। जून के दूसरे पखवाड़े से बरसात का सीजन शुरू माना जाता है। प्रशासन भी बाढ़ नियंत्रण की तैयारियां भी इससे पहले पूरी कर लेती है, परंतु इस बार स्थानीय प्रशासन बाढ़ नियंत्रण की तैयारी करना ही भूल गया है।
प्रत्येक वर्ष क्षेत्र में ढेला और कोसी नदी भारी तबाही मचाती हैं। ढेला नदी से काशीपुर नगर और गेबिया नाला से अल्ली खां लक्ष्मीपुर पट्टी डूब जाती है। बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन स्कूलों धर्मशालाओं में ठहराते हैं। कोसी नदी से परमानंदपुर, अजीतपुर सहित दर्जनों गांव डूब जाते है। इसी प्रकार बहला नदी भी भारी तबाही मचाती है। पिछले साल तो बहला नदी का पानी आईआईएम के छात्रावास में घुस गया था। प्रशासन ने बचाव के लिए पहले ही बाढ़ नियंत्रण कक्ष तथा बाढ़ चौकियां स्थापित कर कर्मचारियों तथा विभागों का जिम्मेदारियां सौंप दी थी, परंतु इस साल प्रशासन ने अब तक बाढ़ नियंत्रण के लिए विभागों की बैठक तक नहीं बुलाई है। प्रशासन के इस गैर जिम्मेदाराना रुख पर लोग अचंभित हैं, अगर अचानक बरसात शुरू हो गई और बाढ़ आ गई तब प्रशासन क्या करेगा।
प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं है : राजीव
काशीपुर। भाजपा के पूर्व विधायक राजीव अग्रवाल ने सख्त टिप्पणी कर कहा कि राज्य में प्रशासन नाम की कोई चीज है ही नहीं है। सरकार में बैठे मंत्रियों को जनहित से कोई सरोकार नहीं रह गया है। अब तक की परंपरा रही है कि प्रशासन बरसात शुरू होने से पहले ही बाढ़ से बचाव की तैयारियां पूरी कर लेते थे, परंतु अब तो प्रशासन कहीं दिखाई नहीं देता है। ऐसे में जनहित के काम कौन करेगा। प्रशासन पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है।
शीघ्र बुलाई जाएगी बाढ़ नियंत्रण बैठक : एसडीएम
काशीपुर। काशीपुर के एसडीएम जगदीश लाल ने बताया जिलाधिकारी ने 27 मई को रुद्रपुर में बाढ़ नियंत्रण के लिए जिलेभर के अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। अब वह भी जल्द यहां बाढ़ नियंत्रण के लिए अधिकारियों की बैठक बुलाएंगे। उनके पास काशीपुर क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों की सूची मौजूद है।