बिहार से दिल्ली आया 9वीं पास चंदन यादव साइबर ठगों के संपर्क में आकर शातिर अपराधी बन गया। एमएसएमई की वेबसाइट पर फर्जी फर्म पंजीकृत कराकर वह गरीबों के नाम से बैंकों में खाते खुलवाता था। इन खातों को लोगों से ठगी करने वालों को किराए पर देता था।
आठ साल पहले बिहार से दिल्ली आया 9वीं पास चंदन यादव साइबर ठगों के संपर्क में आकर शातिर अपराधी बन गया। एमएसएमई की वेबसाइट पर फर्जी फर्म पंजीकृत कराकर वह गरीबों के नाम से बैंकों में खाते खुलवाता था। इन खातों को लोगों से ठगी करने वालों को किराए पर देता था और खाते में ठगी से आए रुपयों में से 20 फीसदी अपने पास रखता है। उसने 50 से अधिक फर्म पंजीकृत कराकर 200 से अधिक खाते खोले हैं।
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अल्मोड़ा में लेक्चरर से हुई ठगी में साइबर थाना पुलिस ने चंदन यादव को गिरफ्त में लिया तो उसने पूरे सिंडिकेट को उजागर करते हुए बताया कि वह 9वीं पास है। आठ साल पहले दिल्ली में रोजगार की तलाश में आया था। कुछ साल बाद वह साइबर ठगों के संपर्क में आ गया था। इसके बाद उसने फर्जी खाते खोलकर ठगों को देने का धंधा शुरू किया था। वह किसी गरीब या दिव्यांग को लालच देकर आधार कार्ड और दूसरे दस्तावेज लेता था। इसके बाद एमएसएमई की वेबसाइट पर फर्म पंजीकृत कराता था।
इसके बाद एक दुकान किराए पर लेकर उसका रेंट एग्रीमेंट कर जीएसटी में पंजीकरण के बाद फर्म के नाम से खाता खोलता था। इसमें गरीब के दस्तावेज लगाता था। फर्म के नाम से एक नहीं बल्कि कई बैंकों में खाता खुलवाता था और फर्जी सिम लेकर उसका नंबर खाते में दर्ज कराता था। बैंक से दुकान के पते पर आई खाते की किट (पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड) लेने के बाद घाटा होने की बात कहकर दुकान समेट लेता था। इसके बाद किट की मदद से खाते की यूपीआई आईडी बनाकर इंटरनेट बैंकिंग शुरू करता था।
साइबर थाना पुलिस स्टेशन प्रभारी ललित मोहन जोशी ने बताया कि वह ठगी करने वालों को खाता 20 हजार रुपये में किराए पर देता था। साथ ही खाते में ठगी से आने वाली रकम में से भी वह 20 फीसदी कमीशन लेता था। एक फर्म के नाम पर छह से सात खाते निजी और सरकारी बैंकों में खुलवाता था।
दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में खोले खाते
चंदन ने बताया कि उसने दिल्ली के अलावा राजस्थान, हरियाणा सहित कई राज्यों में फर्जी फर्म पंजीकृत कराकर फर्जी खाते खोलकर किराए पर दिए थे। कई बार ठगी की शिकायत होने पर पुलिस खाते फ्रीज कर देती थी, जिस पर उसको कुछ नहीं मिलता था। बताया कि वह खाते का ब्यौरा दूसरे सहयाेगियों को व्हाट्सएप से मुहैया कराते हैं। खाते में उनका दर्ज किया नंबर रहता है। इसके लिए उनको खाते में रकम आने की जानकारी मिलती है। वे ठगी के बाद रकम को खाते में ट्रांसफर करते हैं। यह रकम एक खाते से दूसरे और फिर कईं खातों में चंद मिनटों में ट्रांसफर कर दी जाती है।
अनजान काॅल पर लालच में आने से बचें
एसएसपी एसटीएफ आयुष अग्रवाल ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के लोक लुभावने अवसरों, फर्जी साइट, धनराशि दोगुना करने व टिकट बुक करने वाले अनजान लोगों के प्रलोभन में न आएं। वे फर्जी निवेश ऑफर जैसे यूट्यूब लाइक, सब्सक्राइब, टेलीग्राम आधारित निवेश वेबसाइट ऑफर में निवेश न करें। किसी भी अनजान व्यक्ति से सोशल मीडिया पर दोस्ती न करें। किसी भी प्रकार के ऑनलाइन नौकरी के लिए आवेदन से पहले साइट का पूरा सत्यापन संबंधित कंपनी से करा लें। गूगल से किसी भी कस्टमर केयर नंबर सर्च न करें। शक होने पर तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन को संपर्क करें। वित्तीय साइबर अपराध घटित होने पर तुरंत 1930 नंबर पर संपर्क करें।