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तराई के 59 हजार से अधिक किसानों ने उठाया फसल बीमा का लाभ

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59 हजार से अधिक किसानों का फसल बीमा
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रुद्रपुर। फसल बीमा योजना का लाभ लेने में तराई के किसान पीछे नहीं हैं। वर्ष 2016-17 में तराई के 59025 किसानों ने फसल बीमा कराया। इसी वर्ष में क्षतिपूर्ति के रूप में बीमाधारक जिले के किसानों को 14.35 लाख रुपये की राशि भी दी गई। वहीं सहकारी समितियों के बैंकों का तराई के किसानों पर 94 करोड़ 48 लाख रुपये की देनदारी है, बावजूद इसके कि सहकारी समितियों के बैंकों ने जिले के एक भी किसान की आरसी नहीं काटी है, सिर्फ धारा 95 के तहत अमीन के माध्यम से ही वसूली के लिए किसान के धर पर दस्तक जरूर दी जाती है, लेकिन समितियों की ओर से ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाए।
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फसल बीमा के क्षेत्र में वर्ष 2016-17 के तहत रबी की फसल में 13064 किसानों ने बीमा कराया। हालांकि वर्ष 2016 और 17 में कोई भी आपदा न आने के कारण किसी को क्लेम भी नहीं मिला। वहीं खरीफ की फसल में भी इस वर्ष तराई के 6739 किसानों ने फसल बीमा कराया है। मुख्य कृषि अधिकारी पीके सिंह के अनुसार ऋण लेने वाले किसान के लिए फसल बीमा कराना जरूरी होता है, इसलिए तराई में फसल बीमा कराने में भी किसान पीछे नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा कि फसल बीमा का लाभ किसान व्यक्तिगत तीन बिंदुओं से भी ले सकता है। इनमें ओलावृष्टि, भूस्खलन, जलभराव शामिल हैं। इस आपदा के 48 घंटे के भीतर बीमा कराए गए किसान को सीधे बीमा कंपनी, लीड बैक या फिर उस बैंक से संपर्क करना होता है, इसके बाद किसान क्लेम का हकदार हो जाता है। ओलावृष्टि, जलभराव के चलते क्रॉप कटिंग के तहत पटवारी के मौका मुआयना करने से भी फसल के ऐवरेज के तहत क्षतिपूर्ति मिल जाती है। उन्होंने कहा कि जिले में ऐसा कोई मामला नहीं आया कि किसान की फसल बर्बाद हुई हो और उसे फसल बीमा योजना का लाभ न मिला हो। वहीं जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष सुभाष बेहड़ के अनुसार जिले के किसानों पर सहकारी बैंकों का 94.48 करोड़ रुपये की बकाएदारी है, लेकिन सहकारी बैंकों ने पिछले तीन साल से जिले के किसी भी कर्जदार किसान के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की है। यही कारण है कि तराई के किसान कर्ज में डूबे होने के बाद भी सहकारी बैंकों की नरमी से काफी राहत है। बेहड़ ने बताया कि सहकारी बैंकों के अमीन अपने स्तर से ही कर्जदार किसानों से वसूली कर रहे हैं। पिछले छह माह के भीतर सहकारी बैंकों ने 292 करोड़ रुपये का लोन बांटा है, सहकारी बैंक शाखाओं के सदस्यों पर लगा लोन 29240.12 लाख रुपये है। इनमें बड़ी जोत के किसान सदस्यों पर लोन 9616.85 है जबकि लघु एवं सीमांत किसानों पर लोन की राशि 19623.27 लाख रुपये है। इसमें पूरे जिले से बकाएदारों की संख्या 18341 है। सुभाष बेहड़ ने बताया कि सहकारी बैंक की ओर से किसी भी कर्जदार किसान की आरसी नहीं काटी गई है। धारा 95 के तहत अमीन के माध्यम से ही लोन की वसूली की जाती है। वर्ष में दो बार डिमांड लगती है, जिसमें कर्जदार किसान को छह माह के भीतर कर्ज चुकाने का समय दिया जाता है, उसके बाद कर्ज न चुकाने वाला किसान कर्जदार हो जाता है और उसे केंद्र, राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी खत्म कर दी जाती है, फिर किसान को 10 फीसदी ब्याज के हिसाब से कर्ज चुकाना पड़ता है।
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क्षतिपूर्ति के रूप में 13.35 लाख रुपये की राशि मिली
सहकारी बैंकों का किसानों पर 94.48 करोड़ रुपये का कर्जा
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