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66 संस्थान नहीं कराते जैव चिकित्सकीय कचरे का उचित निस्तारण

Sun, 03 Dec 2017 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर।
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जैव चिकित्सकीय कचरे के निस्तारण को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम कतई चिंतित नहीं है। काशीपुर में करीब पांच दर्जन से अधिक क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब और नर्सिंग होम संचालक ऐसे हैं जो विभाग के लाइसेंस धारक को कचरा उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। यह कचरा अन्य कचरे के साथ ही फेंका जा रहा है।
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जैव चिकित्सकीय कचरे के निस्तारण का दायित्व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग का है। इसके निस्तारण न होने से संक्रामक रोग फैलते हैं। 150 किमी के दायरे में मेडिकल कचरे के निस्तारण के लिए एक संस्था को लाइसेंस दिया जाता है। कुमाऊं मंडल में ग्लोबल इनवायरमेंट सोल्यूशन को कचरे निस्तारण का लाइसेंस दिया गया है।

रुद्रपुर के ग्राम लंबावड़ में जैव चिकित्सकीय कचरे का निस्तारण होता है। संस्था द्वारा कचरे के निस्तारण के लिए डेंटल क्लीनिक से 978 रुपये, पैथोलॉजी लैब से 1654 रुपये, ब्रांडेड पैथोलॉजी लैब के 2883 रुपये, दस बेड तक के अस्पताल के लिए 1800 रुपये, दस से ऊपर बेड पर नौ रुपये प्रति बेड की दर से चार्ज लिया जाता है। अनुबंधित डाक्टरों के यहां हर तीसरे दिन गाड़ी कचरा उठाने आती है। संस्था के अधिकारी वरिंदर सिंह ने बताया कि जिले में 400 से अधिक क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैब अपना जैव चिकित्सकीय कचरा उपलब्ध नहीं कराते। काशीपुर में ही अकेले 66 संस्थान हैं जो कचरा नहीं देते हैं। इनमें 22 से अधिक तो सिर्फ पैथोलॉजी लैब ही हैं। 
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कचरा न देने वाले अधिकतर डॉक्टर गांवों और गली मोहल्लों में क्लीनिक चलाते हैं। जाहिर है कि यह क्लीनिक संचालक अपना कचरा नियमानुसार निस्तारित नहीं कराते और कूड़े के ढेरों अथवा नाली नालियों में फेंक देते हैं। जिससे संक्रामक रोग फैलने का खतरा बना रहता है। जैव चिकित्सकीय कचरे का निस्तारण न करना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम-2010 (एनजीटी) के तहत संज्ञेय अपराध है। इसमें सात साल तक की सजा का प्रावधान है।


जैव चिकित्सकीय कचरे का नियमानुसार निस्तारण न किए जाने का मामला मेरे संज्ञान में आया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के बाहर होने के कारण बैठक नहीं हो सकी है। पांच दिसंबर को चिकित्सकों की बैठक आयोजित कर मेडिकल कचरे के निस्तारण के संबंध में कार्ययोजना तैयार की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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-केके मिश्र, आयुक्त, नगर निगम काशीपुर।
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