राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक में चीनीमिल को पीपीपी मोड पर देने के निर्णय के बाद मिल कर्मियों और किसानों में आक्रोश फूट पड़ा है। शनिवार को चीनीमिल पर गेट मीटिंग का आयोजन कर कर्मचारियों ने सरकार के निर्णय का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मजदूरों की रोजी छीनना चाहती है। कहा कि सड़क पर उतरकर आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
शनिवार को दि किसान सहकारी चीनीमिल पर सीजनल कर्मचारियों ने गेट मीटिंग का आयोजन किया। इसमें कैबिनेट बैठक में चीनीमिल को पीपीपी मोड पर देने का एकस्वर में विरोध जताया। कहा कि जब मिल को पीपीपी मोड पर चलाना था तो मरम्मत के लिए मिल पर डेढ़ करोड़ का खर्च क्यों किए गए। क्षेत्र में गन्ना सेंटर लगा दिए गए। ट्रांसपोर्टरों ने भी ट्रांसपोर्ट के लिए एडवांस बांट दिया।
गन्ना पेराई के लिए चूना, सल्फर, लुब्रीकेंट, बोरा और केमिकल आदि खरीदा जा चुका है। उन्होंने मिल के प्रधान प्रबंधक के टूल डाउन हड़ताल से मिल संचालन की तैयारी प्रभावित होने के आरोप को निराधार और भ्रामक बताया। कहा कि निर्णय के खिलाफ सड़क पर उतरकर सरकार और मिल प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन करेंगे। जरूरत पड़ी तो चक्का जाम भी किया जाएगा। वहां बसपा प्रत्याशी नवतेज पाल सिंह, कांग्रेसी नेता तारक मंडल, एमपी तिवारी, देवानंद सिंह, राजेंद्र बुधलाकोटी, इतेश श्याम, चौधरी विरेंद्र सिंह आदि थे।
किसानों ने फूंका जीएम का पुतला
चीनी मिल को पीपीपी मोड पर देने के कैबिनेट निर्णय का किसानों ने खुलकर विरोध जताया। उन्होंने चीनी मिल गेट पर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और मिल के प्रबंधन वर्ग पर मिल को घाटे में पहुंचाने की जिम्मेदारी का आरोप लगाते हुए प्रधान प्रबंधक का पुतला फूंका। उन्होंने जीएम को तत्काल पद से हटाने की मांग की। उन्होंने कैबिनेट के निर्णय को किसानों के साथ धोखा बताया। उन्होंने शासन से प्रधान प्रबंधक का स्थानांतरण कर मिल संचालन पीसीएस अधिकारी को सौंपने की मांग की। वहां बलजीत सिंह, जागीर सिंह, सुखदेव सिंह, दिलबाग सिंह, शरीफ अहमद, साहब सिंह, डा. जगदेव सिंह, जरनैल सिंह आदि थे। ब्यूरो
चीनी मिल पीपीपी मोड पर संचालित करने के कैबिनेट के निर्णय का अभी तक कोई आदेश नहीं आया। छुट्टी के कारण मामले में किसी उच्चाधिकारी से वार्ता नहीं हुई। सोमवार के बाद आदेश प्राप्त हो सकता है। मिल संचालित करने के लिए काम जारी है। मिल को पूरी तरह से तैयार किया जा रहा है। बीते दिन सहायक गन्ना आयुक्त ने यहां के गन्ना कृषकों की भी सूची मांगी थी। जो उन्हें दे दी गई है। मुझ पर भ्रष्टाचार का आरोप निराधार है। फैक्ट्री के कार्यों की जांच होनी चाहिए। मेरे एक साल के कार्यकाल में चार करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि उनसे पहले जीएम एके रोहतगी के कार्यकाल में पांच करोड़ खर्च हुए। खर्च में ही एक करोड़ की बचत की।
विनीत जोशी-प्रधान प्रबंधक-दि किसान सहकारी चीनी मिल सितारगंज