पुलिस ऊधमसिंह नगर जिले के हर कोने की सीसीटीवी से निगरानी के लाख दावे करे लेकिन सच्चाई कुछ और है। सोमवार को जमीनी हकीकत जानने के लिए अमर उजाला ने पड़ताल की। त्योहारी सीजन में 51 सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े मिले। करीब चार घंटे तक शहर की सुरक्षा मैनुअल पुलिसिंग के भरोसे रही। प्रदेश का प्रमुख कारोबारी शहर रुद्रपुर अपराध के लिहाज से अति संवेदशनशील माना जाता है। हत्या, लूट, चेन स्नैचिंग, अपहरण के मामले किसी से छिपे नहीं हैं। त्योहारी सीजन में अपराधी और अधिक सक्रिय हो जाते हैं। बाजार में भीड़भाड़ के बीच में वारदातों को अंजाम दिया जाता है।
सोमवार को पुलिस ऑफिस में बने सीसीटीवी कंट्रोल रूम के अधिकांश कैमरे बंद मिले। स्क्रीन बंद नजर आई। सोमवार को सुबह 10 बजे से दो बजे तक 51 कैमरे बंद रहे जबकि 41 कैमरे काम कर रहे थे। इसका कारण बिजली जाने के बाद कैमरों का बंद होना बताया गया। हालांकि कर्मचारी दावा करते रहे कि बैकअप नहीं होने से कैमरे बंद हुए हैं। टेक्नीशियन को बुलाकर कैमरे सही करने के लिए कहा गया है।
रुद्रपुर में इस तरह का यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी बैकअप के अभाव में कैमरे ठप हो चुके हैं। अपराध के गढ़ कहे जाने वाले शहर में इस तरह कैमरे बंद हुए तो सुरक्षा को बढ़ा खतरा हो सकता है क्योंकि यहां पलक झपकते ही वारदातें होती हैं।
अपराधियों को पकड़ने के लिए सीसीटीवी जरूरी
ऊधमसिंह नगर में ज्यादातर आपराधिक घटनाओं का सुराग इन्हीं कैमरों से मिलता है। हाल ही में रुद्रपुर कॉलेज फायरिंग केस में भी सीसीटीवी अहम साबित हुए। सोचिए अगर किसी वारदात के वक्त तीसरी आंख बंद हो तो क्या होगा? साफ है कि सुरक्षा से खिलवाड़ और अनदेखी अपराधियों के लिए खुला न्योता है।
कितनी हकीकत, कितना फसाना
किस मद में कैमरों की संख्या इतने लाइव
पुलिस मुख्यालय से 28 28
सड़क सुरक्षा समिति 12 12
प्राइवेट कैमरे 564 400
विधायक निधि 226 205
व्यापार मंडल 243 210
जी-20 आयोजन 69 62
बॉर्डर पर निगरानी के लिए 64 07
थाना स्तर पर 102 88
(नोट- कैमरों की संख्या पुलिस रिकाॅर्ड के अनुसार)