एक दशक से बाढ़ की विभीषिका का दंश झेल रहे सितारगंज और खटीमा के दस गांवों का अब कायाकल्प हो जाएगा। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय भारत सरकार से इन गांवों के लिए बनी 37.99 करोड़ की बाढ़ सुरक्षा योजना को हरी झंडी मिल गई है। कहा कि इससे 13600 की आबादी को बाढ़ से निजात मिलेगी।
पिछले एक दशक से सितारगंज क्षेत्र के उकरौली, नकुलिया, खैराना, कौंधा असरफ, कौंधा रतन गांव की करीब 36 सौ की आबादी बाढ़ का दंश झेल रही है। इन गांवों की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि को कैलाश नदी में समा चुकी है। वर्तमान में भी करीब 26.50 हेक्टेयर जमीन नदी के मुहाने पर है। वहीं, खटीमा क्षेत्र में हर साल मेहरबान नगर, उलानी, सुनपहर, मोहम्मदपुर भुडिया और मोहम्मदगंज खमरिया गांव में देवहा नदी तबाही मचाती है। यहां भी करीब 88.50 हेक्टेयर जमीन बाढ़ से प्रभावित है।
सिंचाई विभाग की ओर से सितारगंज और खटीमा क्षेत्र के दस गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए गांवों में नदियों के किनारे स्टर्ट और सुरक्षा दीवार बनाने का प्रस्ताव राज्य तकनीकी सलाहकार समिति को देने के बाद 10 फरवरी 2014 को इसे अनुमोदित कर गंगा नियंत्रण बोर्ड को भेजा गया था। जो गंगा नियंत्रण बोर्ड से अनुमोदित होने के बाद केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय भारत सरकार में स्वीकृत होने के लिए गया।
बीती नौ नवंबर को केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने सितारगंज में 13 करोड़ 11 लाख 96 हजार और खटीमा में 24 करोड़ 87 लाख 16 हजार की योजना स्वीकृत कर दी। इससे इन दोनों क्षेत्रों के दस गांवों की 13 हजार 6 सौ की आबादी को बाढ़ से निजात मिलेगी।