काशीपुर। अब तक जैव चिकित्सीय कचरे के निस्तारण की जानकारी देने को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने सरकारी अस्पतालों को नोटिस भेजे थे। लेकिन, अब अस्पतालों को जैव चिकित्सीय कचरे के निस्तारण के लिए पीसीबी से सहमति लेनी ही होगी, बल्कि वायु और जल की भी जानकारी देनी होगी।
जैव चिकित्सीय कचरे के निस्तारण के संबंध में पीसीबी ने पहले ही अस्पतालों को नोटिस भेज कचरे के निस्तारण के बारे में जानकारी मांगी है। अब पीसीबी दोबारा जिले के करीब 109 अस्पतालों को नोटिस भेज वायु, जल और जैव चिकित्सीय कचरे के निस्तारण के लिए शुल्क जमा कर सहमति लेने के लिए नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है। पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि एयर वाटर नियम 2016 के तहत पीसीबी से अस्पतालों को सहमति लेना अनिवार्य है।
जिले के 109 अस्पतालों को चिन्हित कर नोटिस भेजे जा रहे हैं। साथ ही शुल्क के लिए आवेदन करने के लिए अलग-अलग मानकों के तहत शुल्क डिटेल भी भेजी जा रही है, ताकि अस्पताल अपने मानकों के अनुसार शुल्क जमा कर सहमति ले सकें। सिंह ने बताया कि शुल्क जमा करने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। यदि इसके बाद भी कोई अस्पताल पीसीबी से सहमति नहीं लेता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि सहमति के लिए आवेदन करने के बाद पीसीबी की एक टीम अस्पतालों का निरीक्षण करेगी। सभी मानक दुरुस्त पाए जाने पर ही सहमति दी जाएगी। उन्होंने बताया कि यह शुल्क वर्ष 2002 से अब तक 2018 तक का जमा करना होगा।
अब तक 95 फीसदी अस्पतालों ने जानकारी दी
काशीपुर। अमर उजाला में जैव चिकित्सीय कचरे के सही निस्तारण नहीं होने के समाचार प्रकाशित होने के बाद पीसीबी ने जिले के 145 अस्पताल, लैबों और नर्सिंगहोमों को नोटिस जारी कर जैव चिकित्सीय कचरे के निस्तारण करने के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने को कहा था।
पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि अब तक 95 फीसदी अस्पतालों ने जैव चिकित्सीय कचरे के निस्तारण के संबंध में जानकारी उपलब्ध करा दी है, जिन अस्पतालों या लैबों ने जानकारी नहीं दी है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई पीसीबी करेगा।