फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अधूरी सेंट्रल जेल में 150 कैदी ज्यादा

Thu, 21 Dec 2017 12:27 AM IST
मो. यामीन अंसारी
विज्ञापन
कैदी - फोटो : FILE PHOTO
विज्ञापन
 संपूर्णानंद सेंट्रल जेल में कैदियों के आने का सिलसिला जारी है। 512 की क्षमता वाली आधी अधूरी सेंट्रल जेल में वर्तमान में कैदियों की संख्या 661 हो गई है। जो मानव अधिकारों का खुला उल्लंघन है। जेल के बैरक आधे-अधूरे हैं और गश्त भ्रमण पथ भी नहीं बने हैं, ऐसे में जेल की सुरक्षा व्यवस्था को खतरा है। जेल प्रशासन की माने तो विभाग द्वारा अभी जेल में 229 कैदी और लाए जाने हैं। जिससे जेल अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
विज्ञापन


 वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने संपूर्णानंद शिविर खुली जेल की 22 एकड़ जमीन पर 512 कैदियों की क्षमता वाली सेंट्रल जेल की नींव रखी थी। वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने सेंट्रल जेल का शुभारंभ किया। 2010 में बाढ़ आने पर खुली जेल के बैरकों में सजा काट रहे उम्रकैद की सजा वाले बंदियों को यहां शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन सेंट्रल जेल का निर्माण पूरा नहीं किया गया। जेल में न तो अस्पताल है और न ही सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। 2011 में प्रदेश की हल्द्वानी, नैनीताल, देहरादून व हरिद्वार की जिला कारागार से यहां कैदी शिफ्ट किए जाने लगे और धीरे-धीरे यह अधूरी जेल कैदियों से भर गई।

 नवंबर तक इस जेल में 565 कैदी सजा काट रहे थे। इनमें खुली जेल के 51 कैदी भी शामिल हैं। इसी माह हल्द्वानी से 71 कैदी और शिफ्ट कर दिए गए। इसके बाद दिसंबर में 25 कैदी और हल्द्वानी से भेजे गए। जेल अधीक्षक टीडी जोशी ने बताया कि जेल में कैदियों को शिफ्ट करना कोई बड़ी मुश्किल नहीं है, लेकिन उनकी सुरक्षा का भय बना रहता है। सेंट्रल जेल में सृजित जेलर, डिप्टी जेलर, बंदी रक्षकों के पदों पर आज तक नियुक्ति ही नहीं हुई है। गश्ती भ्रमण पथ भी नहीं बने हैं और न ही बिजली की सुविधा है। ऐसे में कैदियों की निगरानी में परेशानी आ रही है।
विज्ञापन



अस्पताल न होने से होती है दिक्कतें
सितारगंज। संपूर्णानंद शिविर खुली जेल का अस्पताल बंद होने और सेंट्रल जेल में अस्पताल न बनने से कई दिक्कतें सामने आती हैं। आए दिन कैदियों की हालत खराब भी हो जाती है। कई बुजुर्ग कैदी गंभीर रोगों से भी पीड़ित हैं। ऐसे में अस्पताल व डाक्टर न होने से कैदियों को जान तक गंवानी पड़ रही है। इस महीने भी एक कैदी की इलाज के दौरान मौत हो गई। 

आईजी ने भी नहीं दिखाई गंभीरता
सितारगंज। जेल विभाग संपूर्णानंद सेंट्रल जेल में क्षमता से अधिक कैदियों को शिफ्ट तो कर रहा है, लेकिन जेल में कैदियों के लिए होने वाली सुविधाओं को लेकर कोई गंभीर नहीं है। बीती 13 नवंबर को कारागार महानिरीक्षक (आईजी) डा. पीवीके प्रसाद सेंट्रल जेल का निरीक्षण करने पहुंचे तो उन्होंने इस जेल को एक हजार क्षमता वाली जेल बनाने के लिए जेल अधीक्षक से प्रस्ताव मांगा, लेकिन डाक्टर की तैनाती के सवाल पर आईजी इसे शासन स्तर का मामला बताकर चले गए। यहां तक कि प्रदेश में डाक्टरों की कमी भी गिना गए, पर डाक्टर की तैनाती पर कोई आश्वासन नहीं दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें