गूलरभोज। शिक्षा मंत्री आवास पर शिक्षा आचार्यों का धरना-प्रदर्शन मात्र औपचारिकता बनकर रह गया। पुलिस की भारी मौजूदगी के चलते धरना नहीं हो सका। आचार्यों ने सांकेतिक प्रदर्शन कर मंत्री से शिक्षा मित्रों में समायोजित करने की मांग की। शिक्षा मंत्री ने उन्हें आश्वासन देकर वार्ता के लिए देहरादून बुलाया है।
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के कैंप कार्यालय में शनिवार को शिक्षा आचार्यों को शिक्षा मित्र के रूप में समायोजित करने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम निर्धारित था। इसे देखते हुए शनिवार को मंत्री के आवास के अलावा चंदायन मार्ग, भरतपुर मार्ग और गदरपुर मार्ग पर भी बैरकेडिंग लगा दी गई। सीओ कमला बिष्ट के नेतृत्व में गदरपुर दिनेशपुर और बाजपुर थाने से पुलिस फोर्स के साथ ही एक प्लाटून पीएसी, डेढ़ सेक्शन महिला पीएसी के साथ एक फायर ब्रिगेड की गाड़ी तैनात की गई।
सुरक्षा प्रबंध के बीच शिक्षा आचार्य संगठन के बैनर के साथ कैंप कार्यालय पहुंचे और सांकेतिक प्रदर्शन किया। उनके आने पर शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय खुद उनके पास आ गए। जिलाध्यक्ष सगीर अहमद के नेतृत्व में आचार्यों ने बताया कि वर्ष 2010 में कुल 1113 आचार्यों का शिक्षा मित्रों के पदों पर समायोजन होना था। इनमें ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जिले के 208 आचार्यों का समायोजन नहीं हो पाया है।
संगठन के लोगों ने समायोजन को पुनर्जीवित करने की मांग की। इस पर शिक्षा मंत्री ने उनके प्रतिनिधिमंडल को 24 जनवरी को देहरादून सचिवालय आमंत्रित किया। इस दौरान कैैलाश पंडित, हरीश पांडे, गुरमुख सिंह, चंद्रा पाठक, मनोज कांडपाल, मंजू मौर्या, प्रेमपाल कंबोज, ताहिर अली, मीना थापा आदि थे।
डीएलएड और टीईटी वाले ही समायोजित होंगे
गूलरभोज। शिक्षा आचार्यों की समायोजन की मांग पर शिक्षा मंत्री पांडेय ने कहा कि शिक्षा विभाग में प्रशिक्षित शिक्षक जो शिक्षा आचार्य डीएलएड और टीईटी हैं, वहीं आचार्य शिक्षा विभाग में समायोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जो खुद प्रशिक्षित नहीं होगा, वह क्या प्रशिक्षण दे पाएगा। पांडेय ने कहा कि शिक्षा विभाग को मजाक नहीं बनने दिया जाएगा।