रुद्रपुर। कोरोना महामारी में माता-पिता का साया उठने से अनाथ हुए चार बच्चों की मदद के लिए समाजसेवी लगातार सामने आ रहे हैं। विधायक राजकुमार ठुकराल और रमेश ढींगरा ने बच्चों के घर पहुंचकर 11 हजार रुपये की आर्थिक मदद की। विधायक ने एक इलेक्ट्रॉनिक शोरूम में परिवार की सबसे बड़ी बेटी को कभी भी नौकरी करने की पेशकश की। इधर, बैंक ऑफ बड़ौदा के दो अधिकारियों ने बच्चों के घर पहुंचकर बैंक खाता खुलवाया।
दरअसल वार्ड नंबर 30 आदर्श कॉलोनी निवासी चार बच्चों के पिता आनंद पाल की 22 मई को कोरोना संक्रमण से मौत हो गई थी। 11 साल पहले बच्चों की मां का निधन हो गया था। बच्चों के अनाथ होने की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद व्यापारियों के साथ ही कई समाजसेवियों ने बच्चों के घर पहुंचकर आर्थिक सहायता के साथ ही खाद्य सामग्री दी।
बृहस्पतिवार को प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा, समाजसेवी अनिल रावत, रजनीश बत्रा के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा गल्ला मंडी के सहायक प्रबंधक कौशल गंगवार और हिमांशु जोशी बच्चों के घर पहुंचे।
इसके बाद परिवार की सबसे बड़ी बेटी मनीषा सिंह और उसकी बहन के नाम से खाता खुलवाया गया। कौशल ने खाते में 500 रुपये और व्यापारी नरेश गुलाटी ने एक हजार रुपये जमा किए। संजय ने कहा कि बैंक खाता नहीं होने से कई लोग परिवार की मदद नहीं कर पा रहे थे। अब खाता खुलने के बाद नंबर को सोशल मीडिया पर शेयर किया जाएगा।
इधर, विधायक राजकुमार ठुकराल और समाजसेवी रमेश ढींगरा ने बच्चों को 11 हजार रुपये की नकद धनराशि देने के साथ ही भविष्य में हर संभव मदद का भरोसा दिया। कहा कि लड़कियों की शादी के लिए भी हर संभव सहयोग दिया जाएगा। वहां पर सतनाम सिंह, पार्षद आयुष तनेजा, बंटी मक्कड़, शैलेंद्र रावत, सुनीता, संध्या अरोरा, शोभावती वर्मा, सुशांत आदि थे।
पिता के बाद मां की भी मौत, तीन बच्चे हो गए अनाथ
रुद्रपुर। खटीमा में टेंट का कारोबार करने वाले जयप्रकाश गुप्ता का आठ माह पहले सीने में दर्द उठने के चलते निधन हो गया था। उसके बाद जैसे तैसे उनकी पत्नी विमला गुप्ता ने टेंट का कारोबार संभाला। हाल ही में उनकी भी कोरोना से मौत हो गई। अब उनके तीनों बच्चे अनाथ हो गए हैं। उन्होंने सरकार से नौकरी की गुहार लगाई है।
खटीमा के लोहिया हेड रोड निवासी शिवम गुप्ता ने बताया कि बीते 12 मई को बरेली से खटीमा लाते वक्त मां का देहांत हो गया था। कुछ दिनों पहले ही मां की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पीलीभीत के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भी इलाज में सुधार नहीं होने पर मां विमला गुप्ता को बरेली के एक अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया।
वहां डॉक्टर ने उन्हें ब्रेन हेमब्रेज होने की बता कही। अस्पताल में बेड खाली नहीं होने पर खटीमा लाते समय उनकी रास्ते में ही मृत्यु हो गई थी। बताया कि आठ माह पहले पिता जयप्रकाश की अचानक सीने में दर्द उठने से अस्पताल में ही मौत हो गई थी। कोरोना काल में टेंट कारोबार चौपट होने से तीनों भाई-बहन घर में ही बैठे हैं।
शिवम ने बताया कि घर में उनकी बहन शिवानी गुप्ता और उससे बड़ी बहन दिव्या गुप्ता हैं। तीनों भाई-बहन कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं। बताया कि वह एमए की पढ़ाई कर रहे हैं जबकि बड़ी बहन दिव्या गुप्ता ने एमएससी की है। छोटी बहन ने बीएससी और बी. फार्मा किया है। उन्होंने सरकार से नौकरी और आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।