सऊदी अरब के अराफात के मैदान में शनिवार यानी नौ जिल हिज्जा को वकूफ-ए-अराफात अदा करने के बाद उत्तराखंड के 1043 आजमीन हाजी हो जाएंगे। इस दौरान अल्लाह के दरबार में देश-प्रदेश की खुशहाली के लिए दुआ मांगी जाएगी। इसके बाद मक्का शरीफ में तवाफुज्जियारह का रुक्न अदा किया जाएगा।
दावत-ए-इस्लामी हज व उमरा के रीजनल निगरां हाजी साजिद हुसैन अत्तारी ने बताया कि अरबी कैलेंडर के आखिरी माह जिल हिज्जा की नौ तारीख को जोहर का वक्त शुरू होने के बाद जो कोई आजमीन एहराम के साथ लम्हे भर अराफात में दाखिल हो जाएगा। उन्हें हाजी और हज्जन का खिताब मिल जाएगा। मगरिब की अजान होते ही यहां से हाजी मुज्दलिफा के लिए रवाना हो जाएंगे। मुज्दलिफा में मगरिब और इशा की नमाज एक साथ अदा करेंगे और रात वही गुजारेंगे।
अगले दिन फज्र के बाद हाजी बड़े शैतान को कंकर मारेंगे। इसके बाद कुर्बानी होने या किए जाने का इंतजार करेंगे। फिर सिर मुंडवाएंगे। अब हाजी एहराम की पाबंदी से आजाद हो जाएंगे। 12 जिलहिज्जा को सूरज डूबने से पहले मक्का शरीफ आकर हाजी को तवाफुज्जियारह करना अनिवार्य होगा। यहां से रात को मीना के लिए वापसी होगी। दूसरे व तीसरे दिन तीनों शैतान को कंकर मारे जाएंगे। इस तरह हज के अरकान मुकम्मल कर तवाफे रुखसत अदा किया जाएगा।
15 जून को हज होगा। राज्य से सऊदी अरब पहुंचे 1043 आजमीन हज की तैयारी में जुटे हैं। सोशल साइट्स के माध्यम से किसी भी असुविधा के लिए लगातार आजमीनों से जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल सभी आजमीन सकुशल अरकान अदा करने में लगे हैं।
-खतीब अहमद, चेयरमैन उत्तराखंड राज्य हज समिति।