गदरपुर। प्रदेश के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय की विधानसभा में प्राथमिक शिक्षा पटरी से उतरी हुई है। गदरपुर विकासखंड में के ढाई दर्जन से अधिक राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य का जिम्मा एक ही शिक्षक संभाले हुए है।
वहीं चार विद्यालय शिक्षक विहीन चल रहे हैं, जिन पर कामचलाऊ व्यवस्था की गई है। वहीं पांच राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी बच्चों को शिक्षा देने के लिए मात्र एक शिक्षक नियुक्त है। बिना शिक्षक या कामचलाऊ व्यवस्था में नौनिहालों का भविष्य किस तरह संवर रहा होगा, अंदाजा लगाया जा सकता है।
जानकारी के मुताबिक राजकीय प्राथमिक विद्यालय रजपुरा नंबर दो, सकैनिया, बड़ाखेड़ा नंबर दो, गुमचैया कालोनी, नेताजी नगर, आनंदखेड़ा नंबर दो, गिरधरनगर, कुलवंत नगर नंबर दो, दिनेशपुर वार्ड नंबर एक, सूरजपुर, कुआं खेड़ा, अलखदेवा, मिदनापुर, महेशपुर, मोतीपुर नंबर एक, हरिदासपुर, मोतीपुर नंबर दो, जगनपुरी, रिच्छा, रामजीवनपुर नंबर दो, उदयनगर, नारायणपुर दोहरिया, कोपा सिग्नल, गूलरभोज, सुखशांति नगर, चरनपुर, ललपुर दुर्गापुर नंबर दो, दिलीप नगर,अलख देवी में मात्र एक शिक्षक ही कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभाले हुए है।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोतीपुर, नंदपुर, विक्रमनगर और कैनाल कॉलोनी शिक्षकविहीन चल रहे हैं। इनमें दूसरे विद्यालय के शिक्षकों को व्यवस्था के तौर पर लगाया गया है। वहीं राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बरेली नगर नंबर दो, कोपा मुनस्यारी, चक्कीमोड़, बरीराई एवं शिवपुर में एकमात्र शिक्षक तैनात है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मकरंदपुर शिक्षक विहीन चल रहा है, जहां अस्थायी शिक्षक की व्यवस्था की गई है।
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बरेलीनगर नंबर दो को आदर्श विद्यालय के रुप में दर्जा प्रदान किया गया है, वहां केवल एक शिक्षक तैनात है। शिक्षकों की मांग को लेकर ग्रामीण विद्यालय में विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने पर निजी स्कूलों में बच्चों का दाखिल कराने की चेतावनी दी थी। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन स्कूलों में नौनिहालों की किस प्रकार की शिक्षा मिल रही होगी।
निदेशालय से निर्देश मिल चुका है। विद्यालयों में समायोजन की प्रक्रिया चल रही है। सभी शिक्षा अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है और सूची तैयार की जा रही है। अगस्त तक सभी विद्यालयों में मानकों के अनुरूप शिक्षकों की नियुक्ति कर दी जायेगी। - रवि मेहता, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक
मंत्री जी! 17 दिन से बंद है खेल प्रशिक्षण, कब लेंगे सुध
रुद्रपुर। खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए एक तरफ खेल महाकुंभ का आयोजन और प्रदेश को बीसीसीआई से मान्यता दिलाकर वाहवाही लूटी जा रही है, वहीं खेल मंत्री अरविंद पांडेय के गृह जनपद में बजट के अभाव में 17 दिन से खेलों का आयोजन और खेल शिविर बंद हैं। बजट को लेकर भेजे गये प्रस्ताव पर अभी तक शासन से कोई जवाब नहीं आया है।
जिला योजना से मिलने वाले बजट में बड़ी कटौती के चलते बीती सात जुलाई से खेलों के 17 प्रशिक्षण शिविर अग्रिम आदेश तक बंद पड़े हैं। जिला क्रीड़ाधिकारी की तरफ से रुद्रपुर और काशीपुर स्टेडियम में बजट के अभाव में खेल प्रशिक्षण रोकने का पत्र जारी हुआ था। खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था, लेकिन अभी तक शासन से खेलों के लिए किसी प्रकार का बजट अवमुक्त नहीं किया गया है।
मालूम हो कि रुद्रपुर और काशीपुर स्पोर्ट्स स्टेडियम में हॉकी, बैडमिंटन, क्रिकेट, एथलेटिक्स, बास्केटबॉल, वॉलीबाल समेत 22 खेलों के प्रशिक्षण शिविरों में करीब 825 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। बजट न मिलने के कारण इन खिलाड़ियों को भी प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही इन्हें प्रशिक्षण देने वाले संविदा पर तैनात करीब 22 प्रशिक्षकों को तीन महीने से मानदेय नहीं मिला है।
प्रशिक्षकों के वेतन और सामान के लिए एक करोड़ चार लाख रुपये को प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन इसके सापेक्ष मात्र 10 लाख रुपये का अनुमोदन किया गया है। इस बजट से प्रशिक्षकों का मानदेय तक निकलना भी मुश्किल है। ऐसे में जिले के प्रतिभावान खिलाड़ियों की खेल प्रतिभा कैसे निखरेगी, यह समझ से परे है। यह हाल तब है जब 2020 में उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेल प्रस्तावित हैं।
बजट की मांग को लेकर शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक बजट अवमुक्त होने को लेकर किसी प्रकार की सूचना नहीं मिली है।
राशिका सिद्दीकी, जिला क्रीड़ाधिकारी