काशीपुर। चैती मेला में लगने वाला नखासा बाजार का इतिहास करीब 160 वर्ष पुराना है। उत्तरी भारत में बलहोत्रा, पुष्कर, देवा (राजस्थान), बाराबंकी, मकनपुर, सोरों, सैहदपडर, बलियार, बदायूं, अमृतसर में घोड़ों के बाजार लगते हैं।
देशभर से व्यापारी यहां घोड़े खरीदने और बेचने आते हैं। टांडा बादली रामपुर निवासी प्रमुख घोड़ा व्यापारी चौधरी शौकत अली ने बताया कि सुल्ताना डाकू उनके दादा अली बहादुर से घोड़े खरीद कर ले गया था। उसके पिता चौधरी जाफर अली के समय डाकू मान सिंह और मंगल सिंह घोड़े खरीद कर ले गए हैं। उसके पिता जाफर अली से डाकू फूलन देवी घोडे़ खरीद लेकर ले गई।
युद्ध स्तर पर चल रहा है चैती मेले में काम
काशीपुर। चैती मेले में अभी दुकानें नहीं लगी हैं। ठेकेदार के आदमी रात दिन दुकानें बनाने में लगे हैं। दुकानदारों का सामान आना शुरू हो गया है। खेल तमाशा बाजार में बड़े झूले लगने लगे हैं। उद्योग विभाग की हथकरघा वस्त्र प्रदर्शन लगाने की भी तैयारी जोरों से चल रही है।