रुद्रपुर। प्रदेश की सबसे बड़ी औद्योगिक नगरी सिडकुल पंतनगर की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। यहां संचालित 460 से अधिक औद्योगिक इकाईयों की सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा कुछ साल पहले तक 40 पीआरडी जवान उठाते थे। अब इनकी संख्या कम होकर मात्र 10 रह गई है।
कुछ समय तक सिडकुल में हर चौराहे और कंपनियों के आसपास तीन-चार जवान तैनात रहते थे। साल दर साल इनकी संख्या कम होती चली गई। पिछले साल तक करीब 20 जवान तैनात थे। इस साल वह भी आधे रह गए हैं। सिडकुल चौकी में पुलिस जवानों की संख्या भी कम है जिससे रात में गश्त प्रभावित हो रही है। उद्यमियों का कहना है कि सिडकुल एसोसिएशन व प्रशासन के बीच कई पूर्व में एमओयू हुआ था जिसमें सुरक्षा का जिम्मा प्रशासन ने लिया। इसके बाद कुछ दिन तक तो पर्याप्त जवान तैनात किए गए थे। एक स्थान पर दो तीन जवान रहते थे। अब इक्का-दुक्का जवान ही दिखते हैं।
चोरी की घटनाओं में इजाफा
उद्यमियों ने बताया कि बीते कुछ महीनों में फैक्ट्रियों के बाहर खड़े वाहनों से बैटरी चोरी, केबल चोरी और स्क्रैप चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं। सेक्टर-4 और सेक्टर-11 में दो इकाइयों में घुसकर चोरी का प्रयास भी हुआ। उद्यमियों ने कई बार सिडकुल प्रशासन और जिला प्रशासन को पत्र लिखा, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इधर, सिडकुल के आरएम मनीष बिष्ट ने छुट्टी में रहने का हवाला देते हुए अभी कुछ भी बोलने से मना कर दिया।
पहले 40 पीआरडी जवान सिडकुल में सुरक्षा ड्यूटी करते थे। इससे कंपनियों में कड़ा पहरा रहता था। जवानों को रोजगार भी मिलता था। सुरक्षा में कमी करना चिंताजनक है। -गजेंद्र सिंह, अध्यक्ष, सिडकुल एसोसिएशन।
सिडकुल की सुरक्षा भगवान भरोसे है। सड़कों पर वाहन चालकों की मनमानी हो रही है। सुरक्षा के लिए पीआरडी जवान तक नहीं है। प्रशासन को जवानों की संख्या बढ़ानी चाहिए। -अजय तिवारी, पूर्व अध्यक्ष, सिडकुल एसोसिएशन।
पनियों से जो मेंटिनेंस चार्ज लिया जाता है। उसी से पीआरडी जवान भी रखे जाने थे मगर इसका पालन नहीं हो रहा है। सिडकुल की सुरक्षा जरूरी है। -श्रीकर सिन्हा, पूर्व अध्यक्ष, सिडकुल एसोसिएशन।
सिडकुल के आरएम की जिम्मेदारी संभाल रहे एसडीएम मनीष बिष्ट से सुरक्षा में कमी के बारे में जानकारी ली जाएगी। उद्यमों की सुरक्षा में कमी को दूर कराया जाएगा। -नितिन सिंह भदौरिया, डीएम