राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष सुरजीत सिंह गांधी ने शुक्रवार को जसपुर और रुद्रपुर में बैठकें कीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में धार्मिक शिक्षा पर सरकार ने कोई पाबंदी नहीं लगाई है। हालांकि, मदरसों के भीतर मकतब संचालित नहीं किए जा सकेंगे और इसके लिए मस्जिद या घर में अलग व्यवस्था करनी होगी।
गांधी ने बताया कि उत्तराखंड धार्मिक शिक्षा के लिए प्रमाणपत्र देने वाला देश का पहला राज्य बनेगा। अच्छा कार्य करने वाले मदरसों को प्रोत्साहन मिलेगा। ऊधमसिंह नगर में मदरसों की मान्यता के लिए जल्द ही शिविर लगेगा। उन्होंने कहा कि कक्षा एक से आठ तक का पाठ्यक्रम पहले ही जारी हो चुका है। नया पाठ्यक्रम अनुमोदन के लिए शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा कि मदरसा संचालक इस पाठ्यक्रम में संशोधन के सुझाव दे सकते हैं। रुद्रपुर में उन्होंने शिक्षा और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी विपिन सिंह कंडारी ने बताया कि बिना पंजीकरण के संचालित ऐसे 10 मदरसे सील किए गए हैं। बैठक में गांधी ने कमियों को संबंधित विभागों के समन्वय से शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए। परियोजना निदेशक हिमांशु जोशी ने सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के लिए कहा। बैठक में विधायक आदेश सिंह चौहान और राज्य अल्पसंख्यक हुनर परिषद के उपाध्यक्ष यूनुस चौधरी, मो. इख्तियार भी मौजूद रहे।
मदरसा संचालकों की समस्याएं और सुझाव
जसपुर में आयोजित बैठक में मौलाना हाशमी नूरी ने मदरसा संचालकों की ओर से कई समस्याएं उठाईं। उन्होंने रमजान में मदरसों के अवकाश की व्यवस्था में बदलाव न करने का आग्रह किया। संचालकों ने छात्रावास संचालन के लिए अलग अनुमति लेने का मुद्दा भी उठाया। धार्मिक शिक्षा की स्वतंत्रता और पंजीकरण आवेदन में आ रही परेशानियों पर भी बात की गई।