कृषि उत्पादन मंडी परिषद रुद्रपुर ने एफएल-टू (विदेशी मदिरा) से कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में एक मई 2015 से 31 मार्च 2016 तक करीब 10 अरब का कारोबार किया है। वहीं गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में राजस्व वसूली का लाभांश 180 करोड़ रुपये रहा है।
विदेशी मदिरा के 10 महीने के इस व्यापार से मंडी परिषद के आला अफसर इसे बेहतर आय का जरिया मान रहे हैं। वहीं 45 दिन के राष्ट्रपति शासन के दौरान एफएल-टू का कांट्रेक्ट समाप्त होने के बाद मंडी परिषद के अधिकारी इसे बाइंड अप करने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं।
प्रदेश सरकार ने नई आबकारी नीति के तहत उत्तराखंड में शराब कंपनियों के वर्चस्व को समाप्त करते हुए विभिन्न शराब कंपनियों की बिक्री का ठेका कृषि उत्पादन मंडी परिषद के हवाले कर दिया था। पहले होता यह था कि शासन स्तर पर शराब की दुकानों का आवंटन लाटरी पद्धति से करने के बाद भी विभिन्न शराब कंपनियों को अपने-अपने गोदाम खोलने की अनुमति मिली रहती थी, लेकिन सरकार ने शराब कंपनियों से यह हक छीन लिया।
नई नीति के तहत कृषि उत्पादन मंडी परिषद को शराब का थोक विक्रेता बना दिया गया। एफएल-टू का थोक विक्रेता का लाइसेंस मिलने के बाद मंडी परिषद ने रुद्रपुर और देहरादून में दो सुपर स्टोर खोल दिए। जहां से सूबे के दोनों मंडलों को शराब की सप्लाई आबकारी विभाग के दिशा निर्देशन में की जाती थी। रुद्रपुर स्थित सुपर स्टोर से कुमाऊं के विभिन्न जनपदों को शराब यहीं से भेजी जाने लगी। मंडी परिषद के महाप्रबंधक तकनीकी विजय कुमार ने बताया कि दस महीने में मंडी परिषद ने 10 अरब का कारोबार किया है।
हालांकि राजस्व वसूली का काम आबकारी विभाग को करना है लिहाजा मंडी परिषद को कितना राजस्व मिला है इसकी जानकारी आबकारी विभाग के पास होगी। उधर जिला आबकारी अधिकारी राजीव चौहान का कहना है कि एक मई 2015 से 31 मार्च 2016 तक लाभांश राजस्व 180 करोड़ रुपये रहा है। मंडी परिषद के जीएम तकनीकी विजय कुमार ने बताया कि एक अप्रैल से 19 अप्रैल तक भी काम मंडी परिषद ने ही किया। इसके बाद नए शासनादेश में मंडी परिषद से शराब थोक का काम वापस ले लिया गया। अब नई सरकार जो भी निर्णय लेगी उसी के तहत काम किया जाएगा।
मंडी के 31 स्थायी कर्मी भी दे रहे हैं सेवाएं
रुद्रपुर। मंडी परिषद को एफएल-टू का थोक विक्रेता बनाए जाने के बाद मंडी परिषद के ही 31 कर्मचारियों को इसका जिम्मा सौंपा गया। गोदाम में मंडी के 26 कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जबकि उनकी सहायता के लिए 70 कर्मचारी संविदा भी रखे गए हैं। संविदा पर रखे गए सभी कर्मचारी आउट सोर्सिंग से रखे गए हैं, जिनकी मेहनताना का जिम्मा भी मंडी परिषद के ऊपर ही है।
विभागीय काम में आ रही है दिक्कत
रुद्रपुर। एफएल- टू का गोदाम मंडी परिषद में खुल जाने के बाद विभागीय कार्य में भी काफी दिक्कतें पेश आ रही हैं। मंडी के 32 अधिकारी और कर्मचारी एफएल-टू में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं जिस कारण से व्यवस्था चरमरा गई है। मंडी परिषद के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर को गोदाम प्रभारी का जिम्मा सौंपा गया है, जिससे उनका भी काम प्रभावित हो रहा है। मंडी निदेशालय का फाइनेंशियल स्टाफ भी एफएल-टू में अपनी सेवाएं दे रहा है।
चेयरमैन नहीं तो, राजनीति भी नहीं हो रही
रुद्रपुर। कृषि उत्पादन मंडी निदेशालय में वर्तमान में अध्यक्ष का पद रिक्त चल रहा है, जिस कारण से कार्यालय का माहौल भी बदला-बदला सा नजर आ रहा है। सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने-अपने कार्य में पूरी तरह से तल्लीन हैं। कार्यालय के कई लोगों का कहना है कि काम पहले से बेहतर हो रहा है। जब चेयरमैन थे तब भी काम में कोई रुकावट नहीं थी और अब भी काम में व्यवधान पैदा नहीं हो रहा है। इधर जब महाप्रबंधक (प्रशासन) बीएस चलाल से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि चेयरमैन के न होने से काम प्रभावित नहीं हुआ है। कार्यालय संबंधी समस्त समस्याओं का निस्तारण शासन स्तर पर हो रहा है, जो भी पॉलिसी मैटर उसे एफआरडीसी (प्रमुख सचिव वन एवं ग्राम्य विकास) और प्रमुख सचिव कृषि सुलझा लेते हैं, ऐसे में काम प्रभावित होने का सवाल ही नहीं उठता।