सितारगंज चीनीमिल में मरम्मत के बाद रंग रोगन के साथ संचालन को तैयार प्लांट।
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दि किसान सहकारी चीनी मिल दिसंबर के पहले सप्ताह में ही शुरू होनी थी, जिसके लिए मिल प्रबंधन ने बैंक से कर्ज लेकर डेढ़ करोड़ रुपये मिल की मरम्मत पर खर्च कर उसे पूरी तरह तैयार कर दिया। यहां तक कि मिल के ब्वॉयलर में आग फूंककर उसका पूजन भी हो चुका है और क्षेत्र में लगभग 32 गन्ना क्रय केंद्र भी खोल दिए गए हैं। इन पर प्रभारियों की ड्यूटी की सूची बन गई, लेकिन सरकार के पीपीपी मोड पर देने के निर्णय के बाद कर्मचारी और उनके परिजन हताश और निराश हो गए हैं। किसानों की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है।
- दिसंबर के पहले सप्ताह में शुरू होना था पेराई सत्र, 32 केंद्र स्थापित
- पीपीपी मोड के निर्णय ने फेरा किसानों की उम्मीदों पर पानी
सरकड़ा चीनी मिल से 706 कर्मचारी और श्रमिक जुड़े हैं। देहरादून में कैबिनेट की बैठक में चीनी मिल को पीपीपी मोड पर संचालित करने के निर्णय के बाद मिल कर्मियों को उनके और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी है। बताया गया है कि मिल को नवंबर के अंतिम सप्ताह तक पूर्ण रूप से तैयार करने के लिए रात दिन प्लांट की मरम्मत का कार्य किया गया।
करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर मिल की मरम्मत कराई गई। मिल प्रबंधन ने 32 क्रय केंद्र स्थापित कर उनमें तौल कांटे लगा दिए। सभी केंद्रों पर गन्ना गार्ड नियुक्त कर दिए और प्रभारियों की डियूटी की सूची भी बना दी गई। इसके अलावा 23 नवंबर को मिल के ब्वॉयलर में आग फूंककर उसका पूजन कर दिया गया। वाटर व स्टीम ट्रायल हो गया है। सिर्फ पेराई सत्र का शुभारंभ होना था, जिसके लिए मिल के प्रधान प्रबंधक विनीत जोशी बीते दिन देहरादून में गन्ना मंत्री प्रकाश पंत से मिले और मिल संचालन के लिए चार करोड़ की मांग भी की, लेकिन उसके एवज में उन्हें कोई उत्तर नहीं मिला।