उत्तराखंड में सेना और वायुसेना ने शनिवार को बदरीनाथ से 1313 और पिथौरागढ़ से पांच सौ लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
बदरीनाथ में अब भी दो हजार यात्रियों के फंसे होने की सूचना है। शासन के मुताबिक फंसे यात्रियों की संख्या महज 500 ही है।
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मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने बताया कि शुक्रवार को बदरीनाथ से कुल 1313 तीर्थयात्री निकाले गए। इनमें से छह सौ को हेलीकॉप्टर और बाकी को पैदल मार्ग से सुरक्षित स्थान पर लाया गया।
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इसी तरह पिथौरागढ़ जिले केदारमा और जोआर से 500 लोगों को निकाला गया। कुमाऊं में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकाप्टरों की संख्या और बढ़ाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावितों और मृतकों के परिजनों को राहत राशि बांटने का काम शुरू कर दिया गया है।
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तीर्थयात्रियों को निकालने केसाथ ही अब विभिन्न स्थानों पर फंसे स्थानीय लोगों को निकालने के लिए भी दबाव बढ़ रहा है। इस दिशा में काम भी किया जा रहा है। यही वजह है कि निकाले जा रहे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है।
मुख्य सचिव ने बताया कि उत्तरकाशी के 26, चमोली के पांच, पिथौरागढ़ के 13, रुद्रप्रयाग के 15 गांवों में हेलीकाप्टर से खाद्यान्न सामग्री गिराई गई। कुल 140 गांवों में इसी तरह सामान पहुंचाना है।
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अभी तक राहत सामग्री लेकर आए छोटे-बड़े कुल 275 वाहन रिसीव किए हैं। इनमें से गुप्तकाशी के लिए 45, चिन्यालीसौड़ के लिए 36 और गौचर के लिए 17 ट्रक रवाना किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अतिरिक्त इंदिरा आवास और पीएमजीएसवाई के तहत 500 किमी. सड़क के लिए अतिरिक्त राशि देने का निर्णय लिया है। पहाड़ में अब भी 36 मार्ग अवरुद्ध हैं।
इनमें से तीस प्रतिशत एक महीने में और बाकी को खोलने में दो से तीन महीने का समय लग सकता है। 237 पेयजल परियोजनाओं में से 48 में आपूर्ति शुरू हो गई है। इसी तरह अंधेरे में डूबे गांवों की संख्या 658 से घटकर 475 ही रह गई है।
स्थानीय लोग ही जाएं नंदा राजजात
मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने भी अपील की है कि नंदा राजजात यात्रा में केवल स्थानीय लोग ही जाएं। यह अपील मौसम के मिजाज को देखते हुए की गई है। उल्लेखनीय है कि नंदा राजजात यात्रा 29 अगस्त से शुरू होनी है।