25 अप्रैल को लोकसभा का सत्र आहूत करने के साथ ही राष्ट्रपति शासन और सरकार गठन के मुद्दे पर उत्तराखंड अब निर्णायक दौर की तरफ अग्रसर है।
सत्र बुलाना साफ संकेत दे रहा है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने उत्तराखंड के भविष्य की रणनीति तय कर ली है और वह कुछ ही दिनों में अमल में आ जाएगी।
कुल मिलाकर केंद्र के सामने अब सीमित विकल्प हैं, या तो राष्ट्रपति शासन को लागू रखने के लिए संसद से मंजूरी ले या फिर किसी की सरकार का गठन करा दें। वर्ना एक ही रास्ता बचेगा और वह है विधानसभा भंग करने का। सूत्रों की माने तो भाजपा, भगत दा के नेतृत्व में सरकार गठन की कवायद में जुटी है।