पुनर्वास की मांग को लेकर पिछले 11 दिन से आंदोलनरत टिहरी बांध प्रभावित रौलाकोट गांव के ग्रामीणों ने अब आंदोलन की धार और तेज करने का निर्णय लिया है। एक नवंबर को वे डोबरा-चांठी पुल के ऊपर प्रदर्शन करेंगे। नौ नवंबर को प्रस्तावित डोबरा-चांठी पुल लोकार्पण कार्यक्रम का विरोध करने की चेतावनी दी।
रौलकोट के ग्रामीण पुनर्वास की मांग को लेकर सोमवार को तीसरे दिन भी क्रमिक अनशन पर डटे रहे। धरना स्थल पर हुई बैठक में बांध प्रभावितों ने कहा कि वे 16 अक्तूबर से प्रतिदिन मांग के समर्थन में शांतिपूर्ण धरना देते आ रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन उनकी सुध लेेने को तैयार नहीं है। कहा कि टिहरी झील का जलस्तर बढ़ने और कम होने पर उनकी आवासीय भवनों पर लगातार दरारें पड़ रही है। खेती योग्य भूमि 2005 में झील में डूब चुकी है, जिससे उनके आजीविका के साधन खत्म हो गए हैं। कहा कि शासन-प्रशासन को जगाने के लिए एक नवंबर से आंदोलन की धार तेज की जाएगी। डोबरा-चांठी पुल लोकार्पण से पहले यदि उनका पुनर्वास नहीं किया जाता है, तो वे लोकार्पण कार्यक्रम का विरोध करेंगे। क्रमिक अनशन पर रोबिन धनाई, अनुप डंगवाल, दीपक बिष्ट बैठे रहे। ग्राम प्रधान आशीष डंगवाल, सागर भंडारी, हीरा लाल, आकाश डंगवाल, इंद्रा देवी, मनीषा बिष्ट, गुरु प्रसाद थपलियाल, सुमित बिष्ट, सुमन बिष्ट ने धरना दिया।