आखिरकार वर्षों बाद हेंवलघाटी के नागणी में मत्स्य विभाग और ग्रामीणों के बीच जमीन को लेकर चल रहे विवाद का निपटारा होने की उम्मीद जगी है। ग्रामीणों के निर्माण कार्य के विरोध को देखते हुए बुधवार को तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर मौका मुआयना कर खेतों की नाप-छाप की और विभाग के साथ वार्ता का आश्वासन दिया।
पलास गांव के ग्रामीणों की नागणी के समीप सिंचित खेत हैं। खेतों में धान, गेहूं, सब्जी, दलहन उगाकर ग्रामीण अपनी आजीविका चलाते हैं। पीड़ितों का कहना है कि वर्ष 1989 में उद्योग विभाग ने उद्योग लगाकर प्रभावितों को रोजगार देने के नाम पर उनसे जमीन की डिमांड की, जिस पर ग्रामीणों ने रोजगार के सब्जबाग देखकर औने-पौने दामों में 31 नाली जमीन उद्योग विभाग को बेच दी।
विभाग ने उद्योग लगाने के बजाए ग्रामीणों की जमीन को मत्स्य विभाग को बेच दी। कई वर्ष बीत जाने के बाद पिछले दिनों मत्स्य विभाग के ठेकेदार जमीन की घेरबाड़ करने पहुंचे थे, जिस पर ग्रामीणों ने काम बंद करवाकर कर्मियों को बैरंग लौटा दिया था।
इस पर बुधवार को तहसीलदार टिहरी शक्ति प्रसाद उनियाल ने बेचे गए खेतों का मुआयना कर नाप-छाप की। उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि अब जमीन मत्स्य विभाग के नाम है और विभाग की जमीन पर काम रोका जाना गलत है।
जिस पर प्रधान विजयपाल सिंह राणा, संजय मैठाणी, बलदेव सिंह ने कहा कि रोजगार की आस में ग्रामीणों ने अपनी जमीन दी थी। यदि विभाग पीड़ितों को रोजगार देता है, तो इस पर उन्हें कोई हर्ज नहीं है। जिस पर तहसीलदार ने ग्रामीणों को समस्या के समाधान के लिए विभाग के साथ वार्ता कराने का आश्वासन दिया।