गुनसोला लघु जल विद्युत परियोजना से क्षतिग्रस्त फसलों का मुआवजा देने और सिंचाई नहर निर्माण की मांग को लेकर रविवार को चानी के ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों ने चुरेणी पहुंचे तहसीलदार को चार घंटे तक बंधक बनाए रखा। ऐलान किया कि जब तक उनकी समस्या का निराकरण नहीं हो जाता है, तब तक परियोजना के आवासीय कमरों का ताला नहीं खुलने दिया जाएगा।
बाल गंगा नदी पर निर्मित गुनसोला लघु जल विद्युत परियोजना और चानी के ग्रामीणों के बीच लंबे समय से भूमि विवाद चल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी कृषि भूूमि पर अवैध कब्जा कर परियोजना अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आवासीय कालोनी का निर्माण किया गया।
क्षतिग्रस्त फसलों का मुआवजा नहीं देने और सिंचाई नहर का निर्माण नहीं होने पर चानी के ग्रामीणों ने 10 जनवरी को परियोजना की आवासीय कालोनी में ताले लगा दिए थे। रविवार को तहसीलदार मोहन लाल आर्य पुलिस फोर्स के साथ परियोजना की आवासीय कालोनी में ताला तोड़ने पहुंचे। प्रशासन की टीम के परियोजना स्थल पर पहुंचने की भनक लगते ही चानी के ग्रामीण बड़ी संख्या में वहां पहुंच गए।
आक्रोशित ग्रामीणों ने तहसीलदार का घेराव कर उन्हें दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक बंधक बनाकर रखा। धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि जब तक फसलों का मुआवजा, सिंचाई नहर निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो जाता है, तब तक वह आवासीय भवनों का ताला नहीं खुलने देंगे। बाद में तहसीलदार ने परियोजना प्रबंधक रतन सिंह गुनसोला से ग्रामीणों की मोबाइल पर वार्ता कराई। ग्रामीणों ने फसलों का 13 लाख मुआवजा देने की मांग की, लेकिन प्रबंधक गुनसोला छह लाख मुआवजा देने को ही तैयार थे, जिससे वार्ता विफल हो गई।
ग्रामीणों के दबाव में तहसील प्रशासन ने फिर से आवासीय कमरों में ताला जड़ दिया। इस दौरान ग्राम प्रधान किशन सिंह रावत, परामानंद, उत्तम चंद, कुसुम देवी, वैशाखी देवी, विशंबरी देवी, कमला देवी, ममता देवी, बिंदा देवी, राजी देवी, इंद्रा देवी, प्यारी देवी, सालिक राम, महेश आदि मौजूद थे।