तत्कालीन डीएफओ धीरज पांडे के निर्देश पर महिला को कक्ष संख्या-2 आवंटित किया गया। कक्ष आवंटन के रजिस्टर में भी पूजा ठक्कर ने अपने आप को जज लिखाया। अगले दिन 20 जनवरी को जब वन रेंजर नीलम बड़थ्वाल ने उनसे आईडी मांगा तो वह धमकाने लगी।
कैंपटी थाने को सूचना देने पर मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष कैंपटी ने पूछताछ करने के बाद आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया। बृहस्पतिवार को सीजेएम राहुल कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी डा. पूजा ठक्कर को दोषी पाते हुए दो साल के कठोर कारावास और 25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है।