शासन स्तर पर भले ही गढ़वाल विवि से संबद्ध राजकीय महाविद्यालयों को श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध करने की कवायद शुरू हो गई है लेकिन श्रीदेव सुमन विवि के लिए राजकीय महाविद्यालयों को संबद्धता प्रदान करना आसान नहीं होगा। क्योंकि विवि के पास संसाधनों का अभाव बना हुआ है।
संबद्धता देने के लिए विवि विशेषज्ञों का अभाव बना हुआ है। सबसे बड़ी समस्या विवि की परिनियमावली बनकर तैयार नहीं हुई है। इस स्थिति में विवि किन नियमों के तहत राजकीय महाविद्यालयों को संबद्धता प्रदान करेगा।
श्रीदेव सुमन विवि से वर्तमान में 25 नए राजकीय महाविद्यालय और सौ निजी कॉलेज संबद्ध है। कर्मचारियों के अभाव में विवि के सामने सबसे बड़ी चुनौती संबद्ध कॉलेजों की परीक्षा करना और उनका रिजल्ट समय पर घोषित करने की हर समय बनी रहती है।
गढ़वाल विवि से संबद्ध 57 राजकीय महाविद्यालयों को श्रीदेव सुमन से संबद्ध करने की प्रक्रिया चल रही है। 26 अप्रैल को कुलाधिपति केके पॉल की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली कुलपतियों की बैठक में इस मामले में अंतिम निर्णय लिया जाना है। क्योंकि गढ़वाल विवि गत वर्ष ही राजकीय महाविद्यालय को डिएफिलेट करने का पत्र केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेज चुका है।
यदि 26 अप्रैल को होने वाली बैठक में राजकीय महाविद्यालयों को श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध पर निर्णय हो जाता है। तो फिर इस सत्र में श्रीदेव सुमन विवि को राजकीय महाविद्यालयों को संबद्धता प्रदान करना टेढी खीर साबित होगी।
राजकीय महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने, शुल्क का निर्धारण विवि बिना परिनियमावली के कैसे कर पाएग। क्योंकि कर्मचारियों के अभाव में बीएड सत्र 2013-14 की परीक्षाओं का मामला अभी उलझा हुआ है। गत वर्ष की बैंक पेपर परीक्षा की अंक तालिकाए अभी तक संबंधित कॉलेजों में नहीं पहुंच पाई है। जिस कारण छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।