टिहरी झील बनने के बाद दस साल से 35 से 40 किमी की अतिरिक्त दूरी तय कर रहे ढुंगमंदार क्षेत्र के 27 गांवों के लोगों की राह अब आसान होगी। करीब तीन साल से बन रहे घोंटी मोटर पुल का निर्माण पूरा हो चुका है। पुल की फाइनल टेस्टिंग सफल रहने से 12 सितंबर से पुल पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाएगी।
ढुंगमंदार पट्टी को जोड़ने वाला पुल वर्ष 2006 में टिहरी बांध की झील में समा गया था। इससे क्षेत्र की करीब 40 हजार की आबादी मुश्किल में आ गई। सभी ग्रामीण जिला मुख्यालय, श्रीनगर, ऋषिकेश समेत अन्य स्थानों पर जाने के लिए घनसाली होते हुए 35 से 40 किमी की अतिरिक्त सफर तय करने को मजबूर थे।
सरकार ने बांध प्रभावितों की समस्या को देखते हुए वर्ष 2013 में करीब 25 करोड़ की लागत से भिलंगना नदी पर 219 मीटर लंबा मोटर पुल स्वीकृत किया था। कैलाश हिलवेज कंपनी ने 17 सितंबर 2013 को पुल का निर्माण कार्य शुरू किया।
अनुबंध के मुताबिक कंपनी को डेढ़ साल के अंदर पुल का निर्माण पूरा करके देना था, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते पुल का काम समय पर पूरा नहीं हो पाया और पुल की लागत 30 करोड़ 83 लाख तक पहुंच गई। पुनर्वास निदेशालय और कार्यदायी कंपनी के अधिकारियों ने आठ और नौ सितंबर को पुल पर एक साथ चार-पांच वाहनों को दौड़ाकर इसकी टेस्टिंग की है। अब 12 सितंबर को मुख्यमंत्री के हाथों पुल का लोकार्पण किया जाएगा।
इन गांव को मिलेगी सुविधा
पिपोला, सैण, लासी, सारपुल, थात, नववां, मुशांकरी, चौंदाणा, घोंटी, कंडोगी, सुनैल्डी, गहड़, मोल्ठा, चुरेड़ा, सेम्या, ढुंग, बड़ोनगांव, कुमारगांव, सेमा, भटवाड़ा, मंदार,म्यूड़ी, कस्तल, सैंज, पिलखी, गौजियाण आदि गांवों को सुविधा मिल सकेगी।
पुल का निर्माण पूरा हो चुका है। टेस्टिंग भी सफल रही है। अब 12 सितंबर से पुल पर वाहनों का आवागमन नियमित रूप से शुरू हो जाएगा। सड़क के डामरीकरण के लिए शासन से बजट की मांग की गई है। बजट मिलते ही डामरीकरण करवाया जाएगा।
-गणेश भट्ट, सहायक अभियंता, पुनर्वास निदेशालय।