नगर पालिका की पहल पर सात दिवसीय त्रिवेणी कौथिग की दूसरी सांस्कृतिक संध्या
लोक गायिका मंजू नौटियाल व लोक गायक गजेंद्र राणा के गीतों की रही धूम
नई टिहरी। नगर पालिका की पहल पर आयोजित सात दिवसीय त्रिवेणी कौथिग की दूसरी सांस्कृतिक संध्या लोक गायिका मंजू नौटियाल और गजेंद्र राणा के नाम रही। विवेक मेमोरियल सुरगंगा सांस्कृतिक मंच के डॉ. विकास फोंदणी निर्देशित मेरी प्यारी टिहरी नाटक का मंचन आकर्षण का केंद्र रहा।
नाटक में टिहरी राजवंश के इतिहास सहित ऐतिहासिक टिहरी शहर के महत्व को मार्मिकता से दिखाया गया जिसे देखकर दर्शक भाव विभोर हो उठे। बौराड़ी स्टेडियम में टीएचडीसी के मुख्य महाप्रबंधक एमके सिंह, डीजीएम मोहन सिंह श्रीस्वाल और पालिकाध्यक्ष मोहन सिंह रावत ने सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव भविष्य में टिहरी की सांस्कृतिक पहचान बनेगा।
छात्र-छात्राओं ने भी शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। इसके बाद लोक गायिका मंजू नौटियाल ने ‘सुरतू मामा...’, ‘हे ब्वै मेरा कमरा पीड़ा...’ पर दर्शक खूब थिरके। वहीं गजेंद्र राणा ने ‘बबली तेरो मोबाइल...’, ‘पुष्पा छोरी पौड़ीखाल की...’, ‘बांद देस्वाली, रत्ना प्यारी...’, ‘मेरी लीला घस्यारी...’ सहित कई गीतों की प्रस्तुति दी।
इस मौके पर सभासद ऋतु भूषण, मधु भट्ट, खेमराज रावत, मानवेंद्र रावत, सीमा नेगी, उर्मिला राणा, विनीत उनियाल, प्रीति पोखरियाल, विजय कठैत, नवीन सेमवाल, प्रवेश चौहान, ईओ वासुदेव डंगवाल, शिव सिंह सजवाण, टीएचडीसी के प्रबंधक मनवीर नेगी मौजूद रहे।
टिहरी के 200 साल का गौरव और दर्द उकेरा मंच पर
नई टिहरी। त्रिवेणी कौथिग में डॉ. विकास फोंदणी कृत मेरी प्यारी टिहरी का संगीतमय मंचन किया गया। जिसमें टिहरी बसने से लेकर डूबने तक की कहानी का पूरा दृश्य दिखाया गया। डॉ. फोंदणी ने बताया यह एक इतिहास गाथा का मंचन है। जो 1803 के गढ़वाल भूकंप से शुरू होती है। इसके बाद खुड़बुड़ा युद्ध में गढ़वाल राजा प्रद्युम्न शाह की वीरगति, राजकुमार सुदर्शन शाह का निर्वासन। फिर टिहरी शहर का बसना, विस्तार, रियासत की जनक्रांति, सुमन की शहादत और टिहरी बांध निर्माण का मार्मिक मंचन शमिल है। नाटक में टिहरी राजवंश के द्वारा बसाए गए टिहरी शहर का बांध के कारण 200 साल में उजड़ जाने को भी बखूबी दिखाया गया। नाटिका में नन्हें कलाकारों के अलावा वरिष्ठ कलाकारों ने शानदार अभिनय दिखाया। नाटक में साहित्यकार महिपाल सिंह नेगी ने भी अभिनय करते हुए बताया कि पूरे टिहरी शहर के इतिहास को यदि जानना है तो इस नाटक में बेहतर तरीके से प्रदर्शित किया गया है। संवाद
जारी-गंगादत्त थपलियाल